07/08/2025
🪑 कुर्सी की कहानी 🪑
कुर्सी मिलते ही बदले अंदाज़ हो गए,
जो कभी अपने थे, आज नवाब हो गए।
हवा में उड़ने लगे हैं जनाब कुर्सी के साथ,
भूल गए कि नीचे अब भी ज़मीन है साथ।
मत कर घमंड उस ऊंचाई पर ए दोस्त,
जिसे वक़्त ने किराए पर चढ़ाया है,
कुर्सी बदलते देर नहीं लगती,
कल तू था, आज कोई और बैठा ह
Hai