01/01/2026
✊ एंजेल चकमा: “हम भारतीय हैं” कहने की क़ीमत?
24 साल के एमबीए छात्र एंजेल चकमा की केवल अपने भाई को बचाने की कोशिश में चाकू मारकर हत्या कर दी गई। “पापा, मुझे बचा लो” – ये उनके आखिरी शब्द थे।
देहरादून में, उन पर ‘चीनी’, ‘चिंकी’ कहकर नस्लीय हमला हुआ। विरोध करने पर चाकूबाजी हुई। 17 दिन अस्पताल में लड़ने के बाद 26 दिसंबर को उनका निधन हो गया।
एक सवाल, दो जवाब:
· परिवार का दर्द: “यह नस्लीय घृणा से प्रेरित हमला था।”
· पुलिस कर रही लीपा पोती..
एक युवा की जान चली गई, लेकिन सच अब भी अधूरा है। हमारी चुप्पी और उदासीनता भी इस जुर्म में शामिल है।
एंजेल सिर्फ एक नाम नहीं, एक सवाल हैं: क्या हर भारतीय को बिना डर के जीने का बराबर हक है?
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