सनातन सेना

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09/09/2018

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08/09/2017

"मध्यप्रदेश के भोपाल शहर के शौर्य स्मारक परिसर में भारतमाता की प्रतिमा स्थापित की जानी है। निर्माण की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा भारतमाता प्रतिमा निर्माण हेतु कंसेप्च्युअल डिज़ाइनिंग प्लान आमंत्रित हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए mp.mygov.in विज़िट करें।" - मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

06/09/2017

12/05/2014

ॐ नमः शिवाय

**छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी**छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी को कहा जाता है। इसे कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को...
02/11/2013

**छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी**

छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी को कहा जाता है। इसे कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसे रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है।

कारण या कथा- इस दिन के व्रत और पूजा के विषय मेँ कथा यह है कि रन्तिदेव नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उन्होने कभी अनजाने मेँ भी कोई पाप नहीँ किया था लेकिन जब उनकी मृत्यु का समय आया तो यमदूत उनके प्राण लेने आ पहुँचें। उन्हेँ सामने देख राजा आश्चर्यचकित होकर बोले - हे दूत! "मैने कभी कोई पाप कर्म नहीँ किया है फिर आप लोग मुझे लेने क्योँ आए है?" राजा दूतोँ से बोले कि आपके यहाँ आने का तात्पर्य है कि मुझे नरक जाना होगा।अतः आप मुझ पर कृपा करके बताएँ कि मुझसे क्या अपराध हुआ है। राजा की विनयपूर्ण वाणी सुनकर यमदूत ने कहा कि एक बार आपके द्धार से एक ब्राह्राण भूखा लौट गया था। यह उसी पाप का फल है।
यह सुनकर राजा ने यमदूतोँ से कहा कि उन्हेँ अपनी भूल को सुधारने का एक मौका दिया जाए। यमदूत ने राजा की प्रार्थना पर उन्हेँ एक वर्ष की मोहलत दे दी। इसके बाद राजा ब्राह्राणोँ के पास गए और उन्हेँ अपनी परेशानी से अवगत कराया। राजा के पूछने पर बाह्राण बोले -हे राजन्! आपको कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करके ब्राह्राणोँ को भोजन कराना होगा। इसके बाद उनसे अपने अपराध की क्षमा याचना करनी होगी। राजा ने वैसा ही किया और वे अपने पाप कर्म से मुक्त होकर बैकुंठ को गए।
इस प्रकार उस दिन से पाप और नरक से मुक्ति हेतु मृत्युलोक मेँ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी का व्रत प्रचलित है।

क्रियाएँ- इस दिन संध्या के पश्चात् दीपक जलाकर यमराज जी से अकाल मृत्यु से मुक्ति व स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए उपासना की जाती है।
इसके अतिरिक्त इस दिन सुबह शरीर पर उबटन लगाकर पानी मेँ चिचड़ी की पत्तियोँ को डालकर स्नान किया जाता है। इससे सुंदरता प्राप्त होती है।

जय सनातन सेना .....

**करवा चोथ का व्रत **एक परिवार में सात भाई थे और उनकी एक बहन थी और उसका नाम चन्द्रावती था,वो बहुत लाडली थी,क्यूंकि वेह इ...
22/10/2013

**करवा चोथ का व्रत **
एक परिवार में सात भाई थे और उनकी एक बहन थी और उसका नाम चन्द्रावती था,वो बहुत लाडली थी,क्यूंकि वेह इकलोती बहन थी,जब वो बड़ी हुई तो उसके विवाह की चिन्ता हुई ,भाइयों को विवाह के बाद बहन का जाना बहुत बुरा लगा परन्तु शादी तो करनी ही थी,बहन ने शादी के बाद करवा चौथ का व्रत रखा,निर्जल व्रत रखा कुछ भी नहीं खाया,शाम को भाइयों ने बहन से कहा की आओखाना खाएं,बहन ने कहा की जबचन्द्रमा निकलेगा तब खानाखाऊँगी,बह भाइयों की बहुत प्यारी थी,इस कारण उन्होंने भी सारा दिन खाना नहीं खाया,भाइयों ने एक उपाए सोचा की किसी तरह से बहन का व्रत जल्दी से खुलवा दे और सब खाना खा लेंगे,उन्होंने क्या कियाकी घर के बाहर जा मैदान था,उसमे बहुत साडी आग लगा दी,और दो भाई छलनी को पकड़करखड़े हो गए और बहन को पुकारने लगे की जल्दी से चन्द्रमा को आकर देख ले चन्द्रमा निकल आया है,बहन ने ऐसे ही किया,जैसे ही बहनव्रत खोलने बैठी ससुराल से खबर आई की जल्दी चलो तुम्हारे पति की हालत बहुत खराब है,बहन ने सोचा की मैंने तो शादी के बाद कोई भी ऐसा अपराध नहीं किया जिस पाप का दंड मुझे मिल रहा है.सरे संसार भर कीस्त्रियाँ आज अपने सुहाग की शुभ कामना के लिए पूजा कर रही हैं और मेरे सुहाग को क्या हुआ,क्या कारण है की मेरे पति इतना सखत बीमार हो गए और मरने को हैं,उसने पंडित से पुछा की बीमारी का क्या कारण है,पंडित ने कहा की पूजा में कोई विघन आ गया है,इस कारण ऐसा हुआ है,पति के ठीकहोने का एक कारण है की पूरेसाल कृष्ण पक्ष का व्रत करो और उसने ऐसे ही किया,
उसके पति को कांटे वाली बीमारी थी,चन्द्रावती पूरे एक वर्ष तक कांटे निकालती रही,अब आँखों पर कांटे रह गए तो करवा चोथ काव्रत आया,बह अपनी नोकरानी से कहकर की 'तू इनका ध्यान रखना मैं करवा चोथ का समान लेकर आती हूँ,नोकरानी के मन में लालच आ गया और उसने आँखों के कांटे निकाल दिए,चन्द्रावती के पति ने पुछा की उसकी पत्नी कहाँ हैं नौकरानी ने कहा की कहीं घूमने फिरने गई होगी,चन्द्रावती के पति ने समझा की इसी औरत ने मेरीएक वर्ष तक सेवा की है अब येही मेरी स्त्री होगी और उसे अपनी रानी बनाने का वचन दे दिया,जब चन्द्रावती समान लेकर आई तो उसके पति ने उससे कहा कीनिकल जा इसी औरत ने मेरी सेवा की है येही मेरी स्त्री है अगले वर्ष जब करवा चौथ आई तो चन्द्रावती पूजन के समय अपनी ही कहानी कहने लगी,इस प्रकार एक बहन थी उसके भाई उसको बहुत प्यार करते थे उन्होंने करवा चौथ के दिन कच्चे चन्द्रमा को अर्ध दिलवा दिया था,और तभी उसके पति को कांटे की बीमारी हो गई,कहानी कहते कहते स्त्री के आँखों से अविरल आंसू गिरते रहे,रोटी हुई उसने कहानी जारी रखी और पति के बुरे व्यबहार के वाबजूद उसके दीर्घ जीवन और स्वास्थ्य की कामना की,इस प्रकार से उसकी कहानी उसके पति ने सुन ली तो उसने सोचा येही मेरी असली स्त्री है,दूसरी औरत तो नौकरानी थी और इसके बाद उसने नौकरानी को निकाल दिया और चन्द्रावती को एक बार फिर अपना लिया,इस प्रकार से चन्द्रावती के सुहाग की रक्षा हुआ,सात भाइयों की बहन से प्रसन्न चित होकर कहा की जैसे करवा चौथ के व्रत से मेरे सुहाग की रक्षा हुई है गौरी माता वैसे ही औरों का सुहाग बना रहे ,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,
जय माता जी की.
किस तरह से इस व्रत को रखना है और क्या क्या काम करना है इस दिन ध्यान से पड़े।
1. प्रातः काल स्नान करके आचमन करके आपको संकल्प करना है के आपके पति, बेटा- बेटी,सुख - सोभाग्य बना रहे।

2. इस व्रत मैं पिता शिव , माता पार्वती, कार्तिके ,गणेश जी तथा चंद्रमा का पूजन करना होता है शास्त्र अनुसार।

3. इस व्रत मैं कथा सुनने का बहुत महत्व है कथा सुने और मन ही मन इश्वर से अपने मनोकामना पूरी करने कामना करे। और इस व्रत को सफल बनाये।

4. व्रत के दोरान किसी भी तरह के वाद विवाद से बचे और अपनी मनोकामना किसी बताये नहीं इसका विशेष ध्यान दे।

5. अछी तरह से सिंगार करे और ध्यान रहे सिंगार का सामान अपना ही इस्तमाल करे।

6. चन्द्र दर्शन होने के बाद ही जल भोजन ले जैसा आप सब जानते है।

7. पूजा के बाद मिटी का करवा ले उसमें चावल ,उड़द की दाल , सुहाग की सामग्री और कुछ धन दान करना होता है।

8. Most Imp: सासु माँ के दिल से पैर छु कर उनको फल ,मेवा , शिगार की सामग्री देनी चाहिए। ध्यान रहे बड़ो के आशीर्वाद के बिना कोई काम नही हो सकता यह याद रखे नहीं तो कोई कुछ नहीं मिलता है यह सत्य है।

9. पूजा के बाद पति को कहे ॐ नमः शिवाय कम से कम 108 जाप करे लेकिन दिल से करना है तब कुछ होगा।

स्त्रियों से यह निवेदन है अपने सास ससुर का आदर करे उनका आशीर्वाद ले नहीं तो कभी भी जीवन मैं सफल नहीं हो सकता है यह सत्य है तो बड़ो का आदर करने से ही पिता शिव प्रसन होते है याद रखे।
धर्म की जिज्ञासा वाले के लिए वेद ही परम प्रमाण है ,अतः हमें वेद में ही देखना चाहिए कि वेद का इस विषय में क्या आदेश है ? वेद का आदेश है—-
व्रतं कृणुत ! ( यजुर्वेद ४-११ )
व्रत करो , व्रत रखो , व्रत का पालन करो
ऐसा वेद का स्पष्ट आदेश है ,परन्तु कैसे व्रत करें ? वेद का व्रत से क्या तात्पर्य है ? वेद अपने अर्थों को स्वयं प्रकट करता है..वेद में व्रत का अर्थ है—-
अग्ने व्रतपते व्रतं चरिष्यामि तच्छ्केयं तन्मे राध्यतां इदमहमनृतात् सत्यमुपैमि !! ( यजुर्वेद १–५ )

हे व्रतों के पालक प्रभो ! मैं व्रत धारण करूँगा , मैं उसे पूरा कर सकूँ , आप मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करें… मेरा व्रत है—-मैं असत्य को छोड़कर सत्य को ग्रहण करता रहूँ
इस मन्त्र से स्पष्ट है कि वेद के अनुसार किसी बुराई को छोड़कर भलाई को ग्रहण करने का नाम व्रत है..शरीर को सुखाने का , रात्रि के १२ बजे तक भूखे मरने का नाम व्रत नहीं है..चारों वेदों में एक भी ऐसा मन्त्र नहीं मिलेगा जिसमे ऐसा विधान हो कि एकादशी , पूर्णमासी या करवा चौथ आदि का व्रत रखना चाहिए और ऐसा करने से पति की आयु बढ़ जायेगी … हाँ , व्रतों के करने से आयु घटेगी ऐसा मनुस्मृति में लिखा है

पत्यौ जीवति तु या स्त्री उपवासव्रतं चरेत् !
आयुष्यं बाधते भर्तुर्नरकं चैव गच्छति !!
जो पति के जीवित रहते भूखा मरनेवाला व्रत करती है वह पति की आयु को कम करती है और मर कर नरक में जाती है …
अब देखें आचार्य चाणक्य क्या कहते है —

पत्युराज्ञां विना नारी उपोष्य व्रतचारिणी !
आयुष्यं हरते भर्तुः सा नारी नरकं व्रजेत् !! ( चाणक्य नीति – १७–९ )

जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना भूखों मरनेवाला व्रत रखती है , वह पति की आयु घटाती है और स्वयं महान कष्ट भोगती है …
अब कबीर के शब्द भी देखें —

राम नाम को छाडिके राखै करवा चौथि !
सो तो हवैगी सूकरी तिन्है राम सो कौथि !!
जो इश्वर के नाम को छोड़कर करवा चौथ का व्रत रखती है , वह मरकर सूकरी बनेगी
ज़रा विचार करें , एक तो व्रत करना और उसके परिणाम स्वरुप फिर दंड भोगना , यह कहाँ की बुद्धिमत्ता है ? अतः इस तर्कशून्य , अशास्त्रीय , वेदविरुद्ध करवा चौथ की प्रथा का परित्याग कर सच्चे व्रतों को अपने जीवन में धारण करते हुए अपने जीवन को सफल बनाने का उद्योग करों

जय सनातन सेना ~~

** माता लक्ष्मी के भाई चन्द्रदेव का दिन -शरद पूर्णिमा **आज शरद पूर्णिमा और खीरशरद पूर्णिमा कि शीतल रात्रि में (9 से 12 क...
18/10/2013

** माता लक्ष्मी के भाई चन्द्रदेव का दिन -शरद पूर्णिमा **

आज शरद पूर्णिमा और खीर
शरद पूर्णिमा कि शीतल रात्रि में (9 से 12 के बीच)
छत पर चन्द्रमा की किरणों में महीन कपड़े से ढँककर रखी हुई
दूध-चावल की खीर अवश्य खानी चाहिए l देर रात होने के
कारण कम खायें,भरपेट न खायें,सावधानी बरतें l रात ऐसा घर के आगंन में रखे l
सुबह गरम करके उपयोग कर सकते हैं l
ढाई-तीन घंटे चन्द्रमा की किरणों से पुष्ट यह खीर पित्तशामक, शीतल, सात्वि
क होने के साथ वर्ष भर प्रसन्नता और आरोग्यता में सहायक सिद्ध होती है l
शरद पूनम की रात को खीर बना कर चंद्रमा की किरणों में रखे… और उसमें
निहारते हुए इस विशेष मंत्र का जप करें
अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारण भेषजात l
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम ll

"हे अच्युत! हे अनंत ! हे गोविन्द !'
इन नामों के उच्चारणरुपी औषधि से
सब रोग नष्ट हों जाते हैंl
माता लक्ष्मी भी प्रस्न्न होती है !

जय श्री चन्द्र देव........
जय माता महालक्ष्मी.........

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