अमृत माँटी स्टोर & इवेंट मेनेजमेंट

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*हमारा संकल्प है कि आप अपना कीमती पैसा खाना पकाने में लगाये न कि दवाइयों में* एल्युमिनियम के बर्तन ओर प्रेशर कुकर के बर्...
11/09/2018

*हमारा संकल्प है कि आप अपना कीमती पैसा खाना पकाने में लगाये न कि दवाइयों में*
एल्युमिनियम के बर्तन ओर प्रेशर कुकर के बर्तन में 7 से 13% ही पोषक तत्त्व बचते है। और मिट्टी की कड़ाही में इससे कई गुना ज्यादा पोषक तत्वों की पूर्ति होती है.....Our new product contact us on whatsapp or facebook
Mobile no. 9799468758

Now in udaipur ....इको फ्रेंडली मिट्टी का प्रेशर कुकर मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाइये ओर अपने जीवन को स्वस्थ बनाइये......
01/09/2018

Now in udaipur ....
इको फ्रेंडली मिट्टी का प्रेशर कुकर
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाइये ओर अपने जीवन को स्वस्थ बनाइये.........for more information plz contact-9799468758

इको फ्रेंडली मिट्टी की बोत्तल
25/07/2018

इको फ्रेंडली मिट्टी की बोत्तल

08/11/2017

कई हजार साल से भारत में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है क्योंकि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे. इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं.
हालांकि आज से 200 साल पहले से ही मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग होना बंद हो गया. इसके पीछे की मुख्य वजह थी बाजार में एल्युमिनियम के बर्तनों का ज्यादा इस्तेमाल करना. लेकिन एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाना शरीर के लिए हानिकारक है. आइये जानते हैं क्यों मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना चाहिए.
1. भोजन धीरे-धीरे ही पकना चाहिए
आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए. साथ ही भोजन में मौजूद सभी प्रोटीन शरीर को खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं. भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है. इसके अलावा आयुर्वेद में इस बात को भी बताया गया है कि जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है. जबकि जो खाना जल्दी पकता है वो खतरनाक भी होता है.
2. सस्ते और आसानी से मिल जाते हैं मिट्टी के बर्तन
भारत में मिट्टी के बर्तन, बाकी धातुओं के बर्तनों के मुकाबले काफी सस्ते होते हैं. मिट्टी से बने ये बर्तन अलग-अलग आकारों और साइज़ में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. और ये काफी सस्ते भी होते हैं. मिटटी से बने इन बर्तनों को आप घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग करके भी खरीद सकते हैं.
3. ज़ायकेदार खाना
अगर आपको खाने में सौंधी-सौंधी खुशबू पसंद है, तो मिट्टी के बर्तन में पका हुआ खाना आपको एक अलग स्वाद का अनुभव कराएगा. मिट्टी के बर्तन में जब खाना पकाया जाता है, तो आंच में पकने से उसमें मिट्टी की खुशबू और मसालों का ज़ायका मिल जाएगा, जो खाने के स्वाद को दो गुना कर देगा.
4. ख़ूबसूरती
कांच और सिरेमिक के बर्तनों की तरह ही मिट्टी के बर्तन भी हर साइज़ और आकार में मिल जाते हैं. जिन पर बेहद खूबसूरत कलाकारी और रंगों का समायोजन भी होता है. जैसे आप अपनी सुबह की चाय का मज़ा कुल्हड़ में ले सकते हैं. इसके अलावा आप पानी को ठंडा करने के लिए मटकी का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये बर्तन आपकी डाइनिंग टेबल को पारम्परिक रूप भी देंगे.
5. स्वास्थ्य लाभ
इंसान के शरीर को रोज 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व मिलने चाहिए. जो केवल मिट्टी से ही आते हैं. एल्यूमीनियम के प्रेशर कूकर में खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं. कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं. केवल मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं. और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है. लेकिन प्रेशर कूकर एल्यूमीनियम का होता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. जिससे टी.बी., डायबिटीज, अस्थमा हो सकता है. प्रेशर कूकर के भाप से भोजन पकता नहीं है बल्कि उबलता है. आयुर्वेद के अुनसार खाना पकाते समय उसे हवा का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश मिलना जरूरी है.
6. ऊष्मा प्रतिरोधी (Heat Resistant)

आम धारणा के विपरीत मिट्टी के इन बर्तनों में ऊष्मा को अवशोषित करने की क्षमता तांबे और लोहे के बर्तनों के मुकाबले ज्यादा नहीं होती, इसलिए ज्यादा गरम होने पर इनके टूटने का खतरा रहता है. लेकिन धीमी आंच पर आसानी से इनमें खाना बनाया जा सकता है. आप इनमें रोज़ाना दाल, चावल और सब्ज़ी पका सकते हैं. भोजन को पकाते समय सूर्य का प्रकाश और हवा का स्पर्श होना आवश्यक है. भोजन को अधिक तापमान में पकाने से उसके सूक्ष्म पोषकतत्त्व नष्ट हो जाते हैं. भोजन को प्रेशर कूकर में पकाने से भोजन पकता नहीं है, बल्कि भाप और दबाव के कारण टूट जाता है, जिसे हम पका हुआ भोजन कहते है. इनकी सबसे अच्छी बात ये है कि इनको आप माइक्रोवेव में ही इस्तेमाल कर सकते हैं.
7. दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त
आपने मिष्टी दोई या दही तो ज़रूर खाया होगा, बंगालियों की तो सबसे पसंदीदा चीज़ होती है ये. लेकिन मिष्टी दोई खाने के लिए आपको बंगाल जाने की जरूरत नहीं है. आप अपने घर पर मिट्टी की हांडी में इसे बना सकते हैं. इसी तरह आप इसमें नॉर्मल दही भी जमा सकते हैं. अगर आप इसमें गर्म दूध डालकर पिएंगे तो आपको दूध बहुत ही स्वादिष्ट लगेगा और आप हमेशा ऐसे ही दूध पीना चाहेंगे क्योंकि मिट्टी की खुशबू दूध के स्वाद को दोगुना कर देगी.
8. कितने प्रकार के होते हैं मिट्टी के बर्तन?
मिट्टी के ये बर्तन कई तरह के मिलते हैं. जिनमें सिरेमिक, क्ले, क्रीमवियर पॉट्स और पैन्स या टेराकोटा के बने हुए बर्तन मिल जाएंगे. इनकी कई तरह की रेंज आपको मिल सकती है. आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से इनका चुनाव कर सकते हैं और इनसे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ हासिल कर सकते हैं.
अगर आप भी जीना चाहते हैं स्वस्थ जीवन तो ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें. बहुत ही कम लोग इस बात को मानेगें लेकिन ये बात तो सच है कि यदि शरीर को रोगमुक्त और लंबी उम्र तक जीना है, तो मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने की आदत डाल

27/08/2016

*लेटेस्ट रीसर्च के अनुसार, मानव शरीर को जरुरी 23 elements इस प्रकार से है।*
कार्बन,
हाईड्रोजन,
ओक्सिजन,
नाईट्रोजन,
फोस्फरस,
पोटाश,
सल्फर,
केल्शियम,
मेग्नेशियम,
सिलिकोन
ये 10 मुख्य और 13 elements गौण है जिसका प्रमाण 0.02% से कम है...
आयर्न,
मोलिब्लेडनम,
बोरोन,
कोपर,
मेंगेनिज,
सोडियम,
झिंक,
निकल,
क्लोरिन,
सेलेनियम,
कोबाल्ट,
वेनेडियम,
आयोडिन
*ये सब खुराक-भोजनमे होना जरुरी है और ये सब मीट्टी मे मौजूद है !
मीट्टीके बरतन मे पकाने से ये सभी तत्त्वो का भोजन मे सुद्रढिकरण होता है.
*फलत:*
*WHOके रीपोर्ट अनुसार,*
*5 % GDP बढता है।*
*10 % से ज्यादा लोगो मे बुद्धिमता बढती है।*
*30 से 70 % वर्कर्स मे कार्यक्षमता बढती है*
*50 % बालमृत्यु कम होता है.* ईसलिये
मीट्टीके बरतन मे खाना पकाने से मनुष्य का स्वास्थ्य सुघरता है...
मनुष्य की बुद्धिमता बढती है...
और कार्यक्षमता बढती है...
नन्हे नवजातों की जाने बचती है।
देशका सर्वांगी विकास होता है...
देशकी विकासशील सरकार को मीट्टीके बरतनोके बारे मे जनजागृतिका राष्टीय अभियान चलाना चाहिए।
माटी के वर्तनो का अधीक से अधीक उपयोग करे। सदा सदा स्वस्थ बने रहे।*
*स्वस्थ भारत विकसीत समाज।*

04/08/2016

मिट्टी के बर्तनों का महत्व ।

हजारों वर्षों से हमारे यहाँ मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता आया है अभी कुछ वर्षों पूर्व तक गाँवों में वैवाहिक कार्यक्रमों में तो मिट्टी के बर्तन ही उपयोग में आते थे। घरों में दाल पकाने, दूध गर्म करने, दही जमाने, चावल बनाने और अचार रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता रहा है। मिट्टी के बर्तन में जो भोजन पकता है उसमें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती जबकि प्रेशर कुकर व अन्य बर्तनों में भोजन पकाने से सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं जिससे हमारे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है। भोजन को धीरे-धीरे ही पकना चाहिये तभी वह पौष्टिक और स्वादिष्ट पकेगा और उसके सभी सूक्ष्म पोषक तत्व सुरक्षित रहेंगे ।

महर्षि वागभट्ट के अनुसार भोजन को पकाते समय उसे सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श मिलना आवश्यक है जबकि प्रेशर कुकर में पकाते समय भोजन को ना तो सूर्य का प्रकाश और ना ही पवन का स्पर्श मिल पाता, जिससे उसके सारे पोषक तत्व क्षींण हो जाते हैं । और प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का बना होता है जो कि भोजन पकाने के लिये सबसे घटिया धातु है क्योंकि एल्यूमीनियम भारी धातु होती है और यह हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर नहीं निकल पाती है । इसी कारण एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग करने से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग होते हैं जैसे अस्थमा, वात रोग, टी.बी. मधुमेह (डायबिटीज), पक्षाघात (पेरेलिसिस), स्मरण शक्ति का कम होना आदि! वैसे भी भाप के दबाव से भोजन उबल जाता है पकता नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह भोजन सबसे अधिक पौष्टिक होता है । भोजन को शीघ्र पकाने के लिये अधिक तापमान का उपयोग करना सबसे हानिकारक है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए जो मिट्टी से ही आते है। जैसे- Calcium, Magnesium, Sulphur, Iron, Silicon, Cobalt, Gypsum आदि। मिट्टी के इन्ही गुणों और पवित्रता के कारण हमारे यहाँ पुरी के मंदिरों (उड़ीसा) के अलावा कई मंदिरों में आज भी मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है। अधिक जानकारी के लिए पुरी के मंदिर की रसोई देखें।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाएं, बहुत स्वादिष्ट एवं पोष्टिक बनता है ।

आओ लोट चलें इंडिया से माँ भारती की और.....

🌴🕉🚩जय श्री कृष्णा🚩🕉🌴

स्वदेशी अपनाओ
28/07/2016

स्वदेशी अपनाओ

09/07/2016

#मिट्टी_के_बर्तनों_में_सेहत_का_राज

कई हजार साल से भारत में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। क्योंकि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से मिलते थे एैसे फायदे जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं।
आज से 200 साल पहले ही मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग होना बंद हो गया। जिसकी मुख्य वजह थी एल्युमिनियम के बर्तनों का ज्यादा इस्तेमाल करना। जो कि शरीर के लिए हानिकारक है। आइये जानते हैं क्यों मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। इससे भोजन पौष्टिक के साथ स्वादिष्ट भी बनता है। साथ ही भोजन में मौजूद सभी प्रोटीन शरीर को खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना थोड़ा धीमा बनता है पर सेहत का फायदा पूर मिलता है।

आयुर्वेद के अुनसार खाना पकाते समय उसे हवा का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश मिलना जरूरी है। लेकिन प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का होता है जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। जिससे टी.बी, डायबिटीज, अस्थमा और पेरेलिसिस हो सकता है। प्रेशर कूकर के भाप से भोजन पकता नहीं है बल्कि उबलता है।

आयुर्वेद में इस बात को बताया गया है की जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह सबसे ज्यादा पौष्टिक तत्व देने वाला होता है। और जो खाना जल्दी पकता है वो खतरनाक भी होता है।

इंसान के शरीर को रोज 18 प्रकार के सूक्षम पोषक तत्व मिलने चाहिए। जो केवल मिट्टी से ही आते हैं।

बर्तनों के अनुसार पोषक तत्व

1. एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

2. पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
3. कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
4. केवल मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

ये बात तो सच है कि बहुत ही कम लोग इस बात को मानेगें और उनमे से कुछ ही लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना पसंद करेगें। लेकिन यदि शरीर को रोगमुक्त और लंबी उम्र तक जीना है तो मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने की आदत डालें।

#अमृत_माटी_स्टोर

 #सेहत_रा_साथी_गारा_रा_तवा,  #मटका_अर्_हांडीभारतीय संस्कृति में खाना बनाने में जिस प्रकार के बर्तनों के उपयोग की परम्परा...
09/07/2016

#सेहत_रा_साथी_गारा_रा_तवा, #मटका_अर्_हांडी

भारतीय संस्कृति में खाना बनाने में जिस प्रकार के बर्तनों के उपयोग की परम्परा रही है, वह आज भी श्रेष्ठ साबित हो रही है। शोध से पता चला है कि मिट्टी के बर्तनों में बने खाने में एल्युमिनियम के बर्तनों में बने खाने की तुलना में 80 प्रतिशत अधिक मिनरल्स पाए जाते हैं। शोध में खुलासा हुआ है कि एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाकर खाने से कई बीमारी होती हैं, क्योंकि ये बर्तन गर्म होकर हल्के-हल्के पिघलकर खाने में मिलते रहते हैंं।

अमृत माटी इंडिया संस्था ने पारम्परिक बर्तनों को बढ़ावा देने और इनकी उपयोगिता से लोगों को अवगत कराने के लिए एक अभियान शुरू किया है। मार्च 2015 में जयपुर से शुरू हुए इस अभियान से देशभर में 50 हजार, राजस्थान में 7 हजार और उदयपुर से 150 लोग जुडे़ हैं। यह संस्था स्वस्थ भारत निर्माण व देश में कुपोषण को कम करने के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है। अभियान का मुख्य उद्द्ेश्य मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से मिलने वाले मिनरल्स की जानकारी लोगों तक पहुंचाना और मिट्टी से बने आधुनिक बर्तन व नई वैरायटी से उनको अवगत कराना है। अम़ृत माटी इंडिया के बर्तनों का उत्पादन अजमेर में हाथों व मशीनों से किया जा रहा है।

#उदयपुर_में_भी_उपलब्ध

शहर में #भुवाना_बाइपास_पर_इंद्रापुरी_कॉलोनी में #अमृत_माटी_स्टोर_है।
यहां माटी के आधुनिक बर्तन, पानी का कैम्पर, तवा, हांडी, थाली, दीपक और किचन में काम आने वाले सभी बर्तन उपलब्ध हैं।
मिट्टी के बर्तनों में बना खाना गर्भवती महिला को खिलाने से बच्चा कभी कुपोषण का शिकार नहीं होता है।

ये हैं मिट्टी के बर्तनों के फायदे

पोषक तत्वों की अधिकता-फाइबर, कार्बोहाईट्रेड, विटामिन ए, सी, कैल्सियम, आइरन 60 से 80 प्रतिशत अधिक मात्रा में पाया जाना।कई बीमारियों से भी बचाते हैं।
कुपोषण को रोकते हैं।खाना स्वादिष्ट बनता है। खाने-पीने की वस्तुए जल्दी खराब नहीं होती।
#अमृत_माटी_स्टोर😊😊

नमस्कार मित्रो।अमृत माटी के जनजागरण का परिणाम अब आने लगा है। 3 वर्षो में 300% तक अधीक हुई मांग।
20/06/2016

नमस्कार मित्रो।
अमृत माटी के जनजागरण का परिणाम अब आने लगा है। 3 वर्षो में 300% तक अधीक हुई मांग।

भरपूर वीटामिन के लिये क्यों जरूरी मिटटी के वर्तन?========----------------===आम तौर पर वीटामिन कि चर्चा बीमारी के बाद या ...
12/06/2016

भरपूर वीटामिन के लिये क्यों जरूरी मिटटी के वर्तन?
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आम तौर पर वीटामिन कि चर्चा बीमारी के बाद या गर्भावस्था में ही होती है। आज कल बढती उम्र में साथ साथ होने वाली बीमारियो से वीटामिन की कमी को जोड़ा जा रहा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि B12 की कमी के कारण डिप्रेशन हो सकता है या वीटामिन K की कमी होने से खून बहना बंद नही होता है। ये विटामीन हमे रोज खाने से मिलते है। अगर इन की कमी हो तो सप्लीमेन्ट लेंना जरूरी हो जाता है। इन कमी से शरीर में रक्त का स्तर कम हो जाता है। मेटाबालीजम का कमजोर होना जेसी परेशानिया भी होती है। ये जानकारी आप को अमृत माटी कि और से दी जा रही हे। बच्चों को होने वाली अनेको बीमारियो में वीटामिन ओषधी की तरह काम करते है।

विटामीन A की कमी के कारण होने वाली बीमारीया।
विटामीन A वसा में घुलनशील हे।यह शरीर में सब से ज्यादा लीवर में सग्रहीत होता है।जो हड्डीया त्वचा आखो और शरीर के अन्य टिश्यू के लियें महत्वपूर्ण है। ये फेफड़े दिल गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिये बहुत जरूरी है।
ऐसे बढ़ाये बीटामिन A
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ये विटामीन सिर्फ मिटटी के वर्तनो से 100% मील पाते हे कीसी भी अन्य वर्तनो में नही। ये अंडे मछली के तेल दूध पनीर गहरे रग कि सब्जीया में पर्यात पाया जाता है।
वीटामिन B
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इसे थायमिन भी कहते है इस की कमी से वेरी वेरी रोग पाचन तंत्र दिल सम्बंधी रोग हो सकते है। विटामीन B कई प्रकार के होते है। जेसे B1,B2,B3,B4,B12 इन की कमी से कई गम्भीर रोग हो सकते है।

बीटामीन C
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यह पानी में घुलनशील विटामीन है। शरीर में मोजुद्
एन्टीआक्सीडेट की रक्षा करता हे। यह शरीर की रसायनिक की
कीर्यओ में सहायक होता है। तथा केलोस्ट्रोल को भी नियन्त्रित करता है।इस की कमी से स्कर्वी हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक केन्सर पित्ताशय और कई गम्भीर रोग हो सकते है।

विटामीन D
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वसा में घुलनशील यह विटामीन भोजन और सूर्य की किरणों से मिलता है। आर्युर्वेद में विशेष रूप से उलेख हे की अच्छे स्वस्थ के लिये वही भोजन करे जिस को पकाते समय वायु और प्रकाश का पूरा पूरा मिलता हो ये जानकारी आप को अमृत माटी की और से दी जा रही है। भोजन और सूर्य के प्रकाश से विटामीन डी मिलता हे ।जिसमे विटामीन D2 अर्गोकैल्सीफरोल तथा D3ज़ को कोलेकैलिसफरोल कहते हे। यह रक्त में केल्शियम और फा

योग शिविर में मिटटी के बर्तनों की जानकारी देते हुए
01/06/2016

योग शिविर में मिटटी के बर्तनों की जानकारी देते हुए

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