SHREE MHALAXMI SEVA SAMITI

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जलजल अणु के आयाम और ज्यामितीय संरचनापानी सभी जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण विलायक हैऔर पृथ्वी की सतह पर बहुतायत में मिलने व...
26/06/2019

जल
जल अणु के आयाम और ज्यामितीय संरचना
पानी सभी जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण विलायक है
और पृथ्वी की सतह पर बहुतायत में मिलने वाला यौगिक है।

सूचना एंव गुण
साधारण नाम जल, पानी नीर
IUPAC नाम ऑक्सीडेन
वैकल्पिक नाम एक्वा, डाईहाइड्रोजन मोनो ऑक्साइड,
हाइड्रोजन हाइड्रॉक्साइड, (और)
अणु सूत्र H2O
CAS संख्या 7732-18-5
InChI InChI=1/H2O/h1H2
मोलर द्रव्यमान 18.0153 g/mol
घनत्व और रूप 0.998 g/cm³ (द्रव 20 °C पर, 1 atm)
0.917 g/cm³ (ठोस 0 °C पर, 1 atm)
गलनांक 0 °C (273.15 K) (32 °F)
क्वथनांक 99.974 °C (373.124 K) (211.95 °F)
विशिष्ठ उष्मा क्षमता 4.184 J/(g·K) (द्रव 20 °C पर)
74.539 J/ (mol·K) (द्रव 25 °C पर)
जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना है - H2O। यह सारे प्राणियों के जीवन का आधार है। आमतौर पर जल शब्द का प्प्रयोग द्रव अवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या जल वाष्प) में भी पाया जाता है। पानी जल-आत्मीय सतहों पर तरल-क्रिस्टल के रूप में भी पाया जाता है।

पृथ्वी का लगभग 71% सतह को 1.460 पीटा टन (पीटी) (1021 किलोग्राम) जल से आच्छदित है जो अधिकतर महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों का हिस्सा होता है इसके अतिरिक्त, 1.6% भूमिगत जल एक्वीफर और 0.001% जल वाष्प और बादल (इनका गठन हवा में जल के निलंबित ठोस और द्रव कणों से होता है) के रूप में पाया जाता है।[3] खारे जल के महासागरों में पृथ्वी का कुल 97%, हिमनदों और ध्रुवीय बर्फ चोटिओं में 2.4% और अन्य स्रोतों जैसे नदियों, झीलों और तालाबों में 0.6% जल पाया जाता है। पृथ्वी पर जल की एक बहुत छोटी मात्रा, पानी की टंकिओं, जैविक निकायों, विनिर्मित उत्पादों के भीतर और खाद्य भंडार में निहित है। बर्फीली चोटिओं, हिमनद, एक्वीफर या झीलों का जल कई बार धरती पर जीवन के लिए साफ जल उपलब्ध कराता है।

जल लगातार एक चक्र में घूमता रहता है जिसे जलचक्र कहते है, इसमे वाष्पीकरण या ट्रांस्पिरेशन, वर्षा और बह कर सागर में पहुॅचना शामिल है। हवा जल वाष्प को स्थल के ऊपर उसी दर से उड़ा ले जाती है जिस गति से यह बहकर सागर में पहँचता है लगभग 36 Tt (1012 किलोग्राम) प्रति वर्ष। भूमि पर 107 Tt वर्षा के अलावा, वाष्पीकरण 71 Tt प्रति वर्ष का अतिरिक्त योगदान देता है। साफ और ताजा पेयजल मानवीय और अन्य जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन दुनिया के कई भागों में खासकर विकासशील देशों में भयंकर जलसंकट है और अनुमान है कि 2025 तक विश्व की आधी जनसंख्या इस जलसंकट से दो-चार होगी।.[4] जल विश्व अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह रासायनिक पदार्थों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए विलायक के रूप में कार्य करता है और औद्योगिक प्रशीतन और परिवहन को सुगम बनाता है। मीठे जल की लगभग 70% मात्रा की खपत कृषि में होती है।

पदार्थों में से है जो पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से सभी तीन अवस्थाओं में मिलते हैं। जल पृथ्वी पर कई अलग अलग रूपों में मिलता है: आसमान में जल वाष्प और बादल; समुद्र में समुद्री जल और कभी कभी हिमशैल; पहाड़ों में हिमनद और नदियां ; और तरल रूप में भूमि पर एक्वीफर के रूप में।

जल में कई पदार्थों को घोला जा सकता है जो इसे एक अलग स्वाद और गंध प्रदान करते है। वास्तव में, मानव और अन्य जानवरों समय के साथ एक दृष्टि विकसित हो गयी है जिसके माध्यम से वो जल के पीने को योग्यता का मूल्यांकन करने में सक्षम होते हैं और वह बहुत नमकीन या सड़ा हुआ जल नहीं पीते हैं। मनुष्य ठंडे से गुनगुना जल पीना पसंद करते हैं; ठंडे जल में रोगाणुओं की संख्या काफी कम होने की संभावना होती है। शुद्ध पानी H2O स्वाद में फीका होता है जबकि सोते (झरने) के पानी या लवणित जल (मिनरल वाटर) का स्वाद इनमे मिले खनिज लवणों के कारण होता है। सोते (झरने) के पानी या लवणित जल की गुणवत्ता से अभिप्राय इनमे विषैले तत्वों, प्रदूषकों और रोगाणुओं की अनुपस्थिति से होता है।

रसायनिक और भौतिक गुण

जलअणुओं मे हाइड्रोजन बंध का एक त्रिआयामी निदर्श

पारे की तुलना मे जल की केशिकीय क्रिया
जल एक रसायनिक पदार्थ है जिसका रसायनिक सूत्र H2O है: जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन के परमाणु सहसंयोजक बंध के द्वारा एक ऑक्सीजन के परमाणु से जुडे़ रहते हैं।

जल के प्रमुख रसायनिक और भौतिक गुण हैं:

जल सामान्य तापमान और दबाव में एक फीका, बिना गंध वाला तरल है। जल और बर्फ़ का रंग बहुत ही हल्के नीला होता है, हालांकि जल कम मात्रा में रंगहीन लगता है। बर्फ भी रंगहीन लगती है और जल वाष्प मूलतः एक गैस के रूप में अदृश्य होता है।

जल पारदर्शी होता है, इसलिए जलीय पौधे इसमे जीवित रह सकते हैं क्योंकि उन्हे सूर्य की रोशनी मिलती रहती है। केवल शक्तिशाली पराबैंगनी किरणों का ही कुछ हद तक यह अवशोषण कर पाता है।
ऑक्सीजन की वैद्युतऋणात्मकता हाइड्रोजन की तुलना में उच्च होती है जो जल को एक ध्रुवीय अणु बनाती है। ऑक्सीजन कुछ ऋणावेशित होती है, जबकि हाइड्रोजन कुछ धनावेशित होती है जो अणु को द्विध्रुवीय बनाती है। प्रत्येक अणु के विभिन्न द्विध्रुवों के बीच पारस्परिक संपर्क एक शुद्ध आकर्षण बल को जन्म देता है जो जल को उच्च पृष्ट तनाव प्रदान करता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण बल जिसके कारण जल अणु एक दूसरे से चिपक जाते हैं, हाइड्रोजन बंध है।
जल का क्वथनांक (और अन्य सभी तरल पदार्थ का भी) सीधे बैरोमीटर का दबाव से संबंधित होता है। उदाहरण के लिए, एवरेस्ट पर्वत के शीर्ष पर, जल 68 °C पर उबल जाता है जबकि समुद्रतल पर यह 100 °C होता है। इसके विपरीत गहरे समुद्र में भू-उष्मीय छिद्रों के निकट जल का तापमान सैकड़ों डिग्री तक पहुँच सकता है और इसके बावजूद यह द्रवावस्था में रहता है।
जल का उच्च पृष्ठ तनाव, जल के अणुओं के बीच कमजोर अंतःक्रियाओं के कारण होता है (वान डर वाल्स बल) क्योंकि यह एक ध्रुवीय अणु है। पृष्ठ तनाव द्वारा उत्पन्न यह आभासी प्रत्यास्था (लोच), केशिका तरंगों को चलाती है।
अपनी ध्रुवीय प्रकृति के कारण जल में उच्च आसंजक गुण भी होते है।
केशिका क्रिया, जल को गुरुत्वाकर्षण से विपरीत दिशा में एक संकीर्ण नली में चढ़ने को कहते हैं। जल के इस गुण का प्रयोग सभी संवहनी पौधों द्वारा किया जाता है।
जल एक बहुत प्रबल विलायक है, जिसे सर्व-विलायक भी कहा जाता है। वो पदार्थ जो जल में भलि भाँति घुल जाते है जैसे लवण, शर्करा, अम्ल, क्षार और कुछ गैसें विशेष रूप से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड उन्हे हाइड्रोफिलिक (जल को प्यार करने वाले) कहा जाता है, जबकि दूसरी ओर जो पदार्थ अच्छी तरह से जल के साथ मिश्रण नहीं बना पाते है जैसे वसा और तेल, हाइड्रोफोबिक (जल से डरने वाले) कहलाते हैं।
कोशिका के सभी प्रमुख घटक (प्रोटीन, डीएनए और बहुशर्कराइड) भी जल में घुल जाते हैं।
शुद्ध जल की विद्युत चालकता कम होती है, लेकिन जब इसमे आयनिक पदार्थ सोडियम क्लोराइड मिला देते है तब यह आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है।
अमोनिया के अलावा, जल की विशिष्ट उष्मा क्षमता किसी भी अन्य ज्ञात रसायन से अधिक होती है, साथ ही उच्च वाष्पीकरण ऊष्मा (40.65 kJ mol−1) भी होती है, यह दोनों इसके अणुओं के बीच व्यापक हाइड्रोजन बंधों का परिणाम है। जल के यह दो असामान्य गुण इसे तापमान में हुये उतार-चढ़ाव का बफ़रण कर पृथ्वी की जलवायु को नियमित करने पात्रता प्रदान करते हैं।
जल का घनत्व अधिकतम 3.98 °C पर होता है।[8] जमने पर जल का घनत्व कम हो जाता है और यह इसका आयतन 9% बढ़ जाता है। यह गुण एक असामान्य घटना को जन्म देता जिसके कारण: बर्फ जल के ऊपर तैरती है और जल में रहने वाले जीव आंशिक रूप से जमे हुए एक तालाब के अंदर रह सकते हैं क्योंकि तालाब के तल पर जल का तापमान 4 °C के आसपास होता है।

एडीआर लेबल, जल से भयानक प्रतिक्रिया करने वाली वस्तुओं के परिवहन हेतु
जल कई तरल पदार्थ के साथ मिश्रय होता है, जैसे इथेनॉल, सभी अनुपातों में यह एक एकल समरूप तरल बनाता है। दूसरी ओर, जल और तेल अमिश्रय होते हैं और मिलाने परत बनाते है और इन परतों में सबसे ऊपर वाली परत का घनत्व सबसे कम होता है। गैस के रूप में, जल वाष्प पूरी तरह हवा के साथ मिश्रय है।
जल अन्य कई विलायकों के साथ एक एज़िओट्रोप बनाता है।
जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विद्युतपघटन द्वारा विभाजित किया जा सकता है।
हाइड्रोजन की एक ऑक्साइड के रूप में, जब हाइड्रोजन या हाइड्रोजन-यौगिकों जलते हैं या ऑक्सीजन या ऑक्सीजन-यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं तब जल का सृजन होता है। जल एक ईंधन नहीं है। यह हाइड्रोजन के दहन का अंतिम उत्पाद है। जल को विद्युतपघटन द्वारा वापस हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजन करने के लिए आवश्यक ऊर्जा, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पुनर्संयोजन से उत्सर्जित ऊर्जा से अधिक होती है।
वह तत्व जो हाइड्रोजन से अधिक वैद्युतधनात्मक (electropositive) होते हैं जैसे लिथियम, सोडियम, कैल्शियम, पोटेशियम और सीजयम, वो जल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर हाइड्रोक्साइड (जलीयऑक्साइड) बनाते हैं। एक ज्वलनशील गैस होने के नाते, हाइड्रोजन का उत्सर्जन खतरनाक होता है और जल की इन वैद्युतधनात्मक तत्वों के साथ प्रतिक्रिया बहुत विस्फोटक होती है।

प्रकृति की एक झलक
14/09/2017

प्रकृति की एक झलक

02/06/2017

वन्य जीवन प्रकृति की
अमूल्य देन है। भविष्य में
वन्य प्राणियों की
समाप्ति की आशंका के
कारण भारत में सर्वप्रथम 7
जुलाई, 1955 को वन्य
प्राणी दिवस मनाया
गया । यह भी निर्णय
लिया गया कि प्रत्येक
वर्ष दो अक्तूबर से पूरे
सप्ताह तक वन्य प्राणी
सप्ताह मनाया जाएगा।
वर्ष 1956 से वन्य प्राणी
सप्ताह मनाया जा रहा
है। भारत के संरक्षण
कार्यक्रम की
आवश्यकताओं को पूरा
करने के लिए एक मज़बूत
संस्थागत ढांचे की रचना
की गयी है । जूलॉजिकल
सर्वे ऑफ इण्डिया,
बोटेनिकल सर्वे आफ
इण्डिया जैसी प्रमुख
संस्थाओं तथा भारतीय
वन्य जीवन संस्थान,
भारतीय वन्य अनुसंधान
एवं शिक्षा परिषद,
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय
वन अकादमी तथा सलीम
अली स्कूल ऑफ
आरिन्थोलॉजी जैसे
संस्थान वन्य जीवन संबंधी
शिक्षा और अनुसंधान
कार्य में लगे हैं। भारत कई
प्रकार के जंगलों जीवों
का, अनेक पेड़ पौधों और
पशु-पक्षियों का घर है।
शानदार हाथी, मोर का
नाच, ऊँट की सैर , शेरों
की दहाड़ सभी एक
अनोखे अनुभव है। यहाँ के
पशु पक्षियों को अपने
प्राकृतिक निवासस्थान
में देखना आनन्दायक है।
भारत में जंगली जीवों
को देखने पर्यटक आते हैं।
यहाँ जंगली जीवों की
बहुत बड़ी संख्या है। भारत
में 70 से अधिक राष्ट्रीय
उद्यान और 400 जंगली
जीवों के अभयारण्य है और
पक्षी अभयारण्य भी हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए
यह जंगल स्वर्ग है परन्तु अब
यहाँ के कुछ जीव जैसे चीते,
शेर, हाथी, बंगाल के शेर
और साइबेरियन सारस अब
ख़तरे में है। भारत की
लम्बाई और चौडाई में
फैला यह जंगल क्षेत्र,
रणथम्भोर राष्ट्रीय
उद्यान, राजस्थान से
हज़ारी बाघ जंगली जीव
अभयारण्य, बिहार से,
हिमालय के जिम कोर्बेट
राष्ट्रीय उद्यान,
अन्डमान के छह राष्ट्रीय
उद्यानों तक एक शानदार
जंगल की सैर कर सकते हैं।
हाथी , चीते, जंगली
भैंसा, याक, हिरन,
जंगली गधे एक सींग
वाला गेंड़ा, साही,
हिम चीते आदि जन्तु
हिमालय में दिखने को
मिलते हैं।
भारत में, विश्व के
अस्सी, प्रतिशत एक
सींग वाले गेंड़ों का
निवास है। काज़ीरंगा
खेल अभयारण्य गेंड़ों के
लिए उपयुक्त निवास है
और प्राकृतिक संस्थाओं
के लिए और जंगली सैर
करने वाले के लिए भी
अच्छी जगह है। भारत के
सोन चिड़िया और ब्लैक
बक, करेश अभयारण्य में
होते हैं। माधव राष्ट्रीय
उद्यान में, जो शिवपुरी
राष्ट्रीय उद्यान
कहलाता था, जीवों
का एक निवास है।
कोर्बोट राष्ट्रीय
उद्यान सबसे प्रसिद्ध है्।
उत्तर भारत में जंगली
जानवरों के पर्यटकों के
लिए अच्छी जगह है। ऐसे
अभयारण्य और
राष्ट्रीय उद्यान, भारत में काफ़ी संख्या में हैं।
भारत में शेरों (बाघ) की संख्या बहुत थी। भारत
का राष्ट्रीय पशु, शेर, तेजी और ताक़त का चिन्ह
है। भारत में बारह बाघ निवास है। शाही बंगाल के
बाघ, सबसे शानदार जाति के पशुओं में से है। विश्व
के साठ प्रतिशत शेरों की संख्या भारत में रही है।
मध्य प्रदेश, शेरों के निवास की सबसे प्रसिद्ध जगह
है। यहाँ बंगाल के शेर, चीतल, चीते, गौर, साम्भर और
कई जीव देखने को मिलते हैं। भारत में जंगली जीवों
के साथ-साथ, पक्षियों की भी संख्या अच्छी है।
कई सौ जातियों के पक्षी भारत में मिलते हैं। घना
राष्ट्रीय उद्यान या भरतपुर पक्षी अभयारण्य
(राजस्थान) में घरेलू पक्षी और ज़मीन पर जीने वाले
पक्षी भी हैं। दुधवा जंगली जीव अभ्यारण में बंदर,
गिद्ध और चील पक्षी भी है। अंडमान के निकोबर
में भी कबूतर पाये जाते हैं।
भारत का वन्य जीवन
संसार में पौधों की
2,50,000 ज्ञात
प्रजातियों में से
15,000 प्रजातियां
भारत में मिलती हैं।
इस प्रकार संसार में
जीव-जन्तुओं की कुल 15
लाख प्रजातियों में से
75,000 प्रजातियां
भारत में पाई जाती हैं।
भारत में पक्षियों की 1,200 प्रजातियां और
900 उप-प्रजातियां पाई जाती हैं।
भारत के सुविख्यात पक्षियों में बहुरंगी
राष्ट्रीय पक्षी मोर उल्लेखनीय है।
पांच फुट की ऊंचाई वाला भव्य सारस तथा
संसार का दूसरा सबसे भारी पक्षी हुकना
(सोहनचिड़िया) महत्त्वपूर्ण पक्षी हैं।
संसार में प्रसिद्ध केवलादेव (भरतपुर) के
राष्ट्रीय उद्यान में ढाई लाख पक्षियों का

विश्व जल दिवस का इतिहासपूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त...
22/03/2017

विश्व जल दिवस का इतिहास
पूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया गया। लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की घोषणा की गयी थी।
इसे पहली बार वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में “पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” की अनुसूची 21 में आधिकारिक रुप से जोड़ा गया था और पूरे दिन के लिये अपने नल के गलत उपयोग को रोकने के द्वारा जल संरक्षण में उनकी सहायता प्राप्त करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया।
विश्व जल दिवस क्यों मनाया जाता है
यह अभियान यूएन अनुशंसा को लागू करने के साथ ही वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष यूएन एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है जिसमें लोगों को जल मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने के लिये यूएन जल उत्तरदायी होता है।
यूएन सदस्य राज्य और एजेंसी सहित, जल के सभी जटिल मुद्दों के पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिये स्वच्छ जल संरक्षण के प्रोत्साहन में विभिन्न एनजीओ और गैर-सरकारी संगठन भी शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम को मनाने के दौरान, जल से संबंधित सभी मुद्दों को जनता के सामने उजागर किया जाता है जैसे किस तरह से साफ पानी लोगों की पहुँच से दूर हो रहा है आदि।
विश्व जल दिवस कैसे मनाया जाता है
पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।
विश्व जल दिवस का थीम
वर्ष 1993 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल”।
वर्ष 1994 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”।
वर्ष 1995 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “महिला और जल”।
वर्ष 1996 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “प्यासे शहर के लिये पानी”।
वर्ष 1997 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विश्व का जल: क्या पर्याप्त है”।
वर्ष 1998 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भूमी जल- अदृश्य संसाधन”।
वर्ष 1999 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”।
वर्ष 2000 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “21वीं सदी के लिये पानी”।
वर्ष 2001 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वास्थ के लिये जल”।
वर्ष 2002 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विकास के लिये जल”।
वर्ष 2003 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भविष्य के लिये जल”।
वर्ष 2004 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और आपदा”।
वर्ष 2005 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “2005-2015 जीवन के लिये पानी”।
वर्ष 2006 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और संस्कृति”।
वर्ष 2007 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”
वर्ष 2008 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वच्छता”।
वर्ष 2009 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल के पार”।
वर्ष 2010 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल”।
वर्ष 2011 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल: शहरी चुनौती के लिये प्रतिक्रिया”।
:वर्ष 2012 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और खाद्य सुरक्षा”।
वर्ष 2013 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल सहयोग”।
वर्ष 2014 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और ऊर्जा”।
वर्ष 2015 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और दीर्घकालिक विकास”।
वर्ष 2016 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय होगा "जल और नौकरियाँ"
वर्ष 2017 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "अपशिष्ट जल" होगा।
वर्ष 2018 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान" होगा।

21/03/2017
21/03/2017

आज जनसंख्या वृद्धि के साथ वन का विनाश भी बढ़ने लगा है। लोगों को यह नहीं मालूम की वृक्ष हमारे जीवन-रक्षक हैं। वृक्षों से ही हमें प्राणप्रद वायु (ऑक्सीजन) की प्राप्ति होती है। वृक्ष एवं जंगलों से हमें हमारी बहुत-सी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, साथ ही वन ही वर्षा कराते हैं। विस्फोटक जनसंख्या तथा मानव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वनों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं। इसी कारण आज वनों का अस्तित्व खतरे में है। वन के साथ-साथ मानव जीवन भी खतरे में है। इस विषम परिस्थिति में वन की रक्षा करना हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म भी है ।

विश्व पशु दिवस : जानिए पशुओं के बारे में कुछ बातेंपशुओं के अधिकारों के बारे में जागरुकता फैलाने केलिये दुनिया भर में हर ...
04/10/2016

विश्व पशु दिवस : जानिए पशुओं के बारे में कुछ बातें
पशुओं के अधिकारों के बारे में जागरुकता फैलाने के
लिये दुनिया भर में हर साल चार अक्टूबर के दिन को विश्व पशु
दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत1931 में इटली के फ्लोरेंस शहर से हुई थी।
आज यह हर देश में चार अक्टूबर
को ही मनाया जाता है। आज विश्व पशु दिवस है और
इस मौके पर चलिए जानवरों के बारे में कुछ जानें।
जानवर मनुष्यों के हमेशा से ही सबसे अच्छे दोस्त
साबित होते रहे हैं। मनुष्य ने अपनी सभ्यता की शुरुआत
से ही जानवरों के साथ बेहतरीन दोस्ती बनाकर रखी
और उसी का नतीजा है कि आज जानवर हमारी कई
जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बदले हमने
जानवरों को क्या दिया हैए उन्हें बेघर कर दियाए उन्हें
ही अपना भोजन बना लिया और जो कभी हमारे परम
मित्र हुआ करते थे उन्हें अपना परम शत्रु बना लिया है।
आज इंसान ने अपने भोजन और शौक के लिए कई ऐसे
जानवरों को लुप्त होने के कगार तक ला खड़ा किया है
जो कभी इस धरती पर बड़ी संख्या में थे। उदाहरण के
लिए शार्क और व्हेल को खाने की प्लेट में रखने वाले
तथाकथित शौकीनों की वजह से जल के इन प्राणियों
की संख्या आज नगण्य हो चुकी है। कुछ ऐसा ही हाल
नीलगायों का भी हुआ है।
जंगली जानवरों की जंगली हालत
किताबों व लोक कथाओं में मनुष्य और जानवरों की
दोस्ती के कई किस्से मशहूर हैं। जानवर मनुष्य का सबसे
अच्छा दोस्त भी माना गया है और इनकी दोस्ती की
कई मिसालें दी जाती हैं। लेकिन कुछ वर्षों से जंगली
जानवरों ने मानव बस्तियों पर हमला कर मनुष्य को ही
शिकार बनाना शुरू कर दिया है। एक जमाने में दोनों
अपने अपने क्षेत्र का उपयोग कर शांतिपूर्वक रह रहे थे।
विकास की बयार और आगे निकलने की होड़ में जब
मानव ने जानवरों के क्षेत्र में अपना अधिकार जमाने के
प्रयास किए तो मामला पेचीदा हुआ। मनुष्य ने अपने
स्वार्थ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और
जंगलों का कटान कर बस्तियां बसाई। इसी जद्दोजहद
में जब जंगली जानवरों के रहने के लिए घर नहीं रहा व
भोजन तलाशने में दिक्कत हुई तो मजबूरन उन्हें मानवीय
बस्तियों का रुख करना पड़ा। यही कारण है कि
जानवर हिंसक हुए और बस्तियों पर इनके हमले बढ़े हैं।
बंदरए सुअर व नील गाय लोगों की फसलों के दुश्मन बने
हैं। रातों रात किसानों की खड़ी फसल चट होती रही
है। जंगलों पर कुल्हाड़ी चलाने के परिणाम हमारे सामने
हैं और हमें यह तब तक भुगतने पड़ सकते हैं जब तक कि हम
जंगली जानवरों को उनके रहने की जगह यानि जंगल
वापस नहीं कर देते। यह तभी संभव है जब मानव जंगल में
अतिक्रमण न करे और जानवरों को शांतिपूर्वक रहने दे
क्योंकि जानवर तभी हिंसक होता है जब उसे अपनी
जान को खतरा महसूस होता है।
आवारा जानवरों की दयनीय स्थिति
जंगली जानवरों की स्थिति को तो हम काबू कर ही
नहीं सकते लेकिन सरकार और प्रशासन शहरों में फैले
आवारा जानवरों को भी सरंक्षित नहीं कर पाती
सड़कों पर खुले घूमते जानवर जनता के लिए तो मुसीबत
पैदा करते ही हैं साथ ही यह कई बार खुद उनके लिए भी
मुसीबत का कारण बन जाता हैं।
कहां खो गई वह आवाज
विश्व पशु दिवस में यह जानना जरूरी है कि बेजुबान
पशुओं के प्रति हम क्या कर रहे हैं। हमारा बर्ताव कैसा
होना चाहिए इस पर सोच नहीं बदली तो वह दिन दूर
नहीं है जब पशु पक्षी ढूंढ़े नहीं मिलेंगे। मुंडेर पर कौवे की
काव काव व आंगन में गौरैया की चहक तो दूर ही हो
गयी है। पशुओं की संख्या भी दिन प्रतिदिन घटती जा
रही है। गायों की भी संख्या में पिछले काफी समय से
कम हुई है। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर गायों की
दुग्ध क्षमता तो बढ़ जाती है लेकिन उनकी जीवन
क्षमता बहुत ज्यादा कम हो जाती है।
तो आइए आज विश्व पशु दिवस के मौके पर हम सभी
मिलकर शाकाहारी बनने का प्रण करें और कोशिश करें
कि जितना संभव हो सकेगा जानवरों के प्रति स्नेह
करेंगें। राजकुमार मिश्र 9993336113

विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर श्री महालक्ष्मी सेवा समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिये जगह जगह सेमीनार रैली ढोल न...
17/06/2016

विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर श्री महालक्ष्मी सेवा समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिये जगह जगह सेमीनार रैली ढोल नगाड़े माजिरे के धुन के साथ पर्यावरणीय स्लोगन गीत कविताओ के माध्यम से लोगो को पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देते हुये वृक्षा रोपण जल संरक्षण के लिये प्रेरित किया

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर में श्री महालक्ष्मी सेवा समिति एपको ग्रामीण एवं पर्यावरण जीव विज्ञान विभाग एपी एस यूनिवर्सिट...
07/06/2016

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर में श्री महालक्ष्मी सेवा समिति एपको ग्रामीण एवं पर्यावरण जीव विज्ञान विभाग एपी एस यूनिवर्सिटी के समिलित तत्वाधान में सहर के विभिन्नय सैक्षणिक संस्थाओं परफेक्ट ,मास्टर माइंड कोचिंग सेन्टरो में सेमिनार आयोजित किये गये अगले रैली कार्यक्रम जिसमें शिक्षक एवं सैकड़ो छात्र छात्राओ ने हिस्सा लिया रैली में ढोल धीरज पाण्डेय ने पकड़ा वहीँ माजिरे की धुन में स्वंय श्री महालक्ष्मी सेवा समिति के अध्यक्ष राजकुमार मिश्र वही उमेश मिश्र कल्पेश तिवारी मोनिका मिश्रा रौशनी गुप्ता गौरव मिश्र रामभुवन पटेल शिद्धार्थ सिंह पवन आदि पर्यावरण स्लोगन एवं गीतों के साथ सिरमौर चोक से स्वामी विवेकानंद पार्क तक किया

पर्यावरण दिवस पर एप्को ग्रामीण APSU पर्यावरण जिव विज्ञान विभाग श्री महालक्ष्मी सेवा समिति द्वारा रीवा शहर के विभिन्न शिक...
05/06/2016

पर्यावरण दिवस पर एप्को ग्रामीण APSU पर्यावरण जिव विज्ञान विभाग श्री महालक्ष्मी सेवा समिति द्वारा रीवा शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में संगोष्ठी सेमिनार किया एवं ढोल मजीरे पर्यावरण स्लोगन व् गीतों के गूंज के साथ बृहद रैली सिरमौर चोक से स्वामी विवेकानंद पार्क तक आयोजित किया जिसमे सैकड़ो छात्र छात्राओ व् पर्यावरण प्रेमी सामिल हुये

05/06/2016

पर्यावरण दिवस 5जून 2016 को शाम 5 बजे से पर्यावरण निबन्ध लेखन प्रतियोगिता एपको ग्रामीण एपी एस यूनिवर्सिटी पर्यावरण जीव विज्ञान विभाग एवं श्री महालक्ष्मी सेवा समिति ने यह प्रतियोगिता कॉलेज चौक स्वामी विवेकानंद पार्क रीवा (म .प .)में आयोजित होगी अतः सभी विद्यालय के छात्र छात्राये सादर आमंत्रित है सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एव 1,2,3 को पुरिस्कृत भी किया जायगा आप सभी ग्रुप मेंबर से अपील है अपने भाई बहन बच्चों को प्रतियोगिता में सामिल होने को कहे धन्यवाद जयदा जानकारी हेतु राजकुमार मिश्र 9993336113 सम्पर्क करे

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