27/03/2025
🚩[ श्री सद्गुरु देवाय नम: ]🚩
❤(दिल•की•बात)❤
"सत्संग प्रेमियों", बच्चे की आंख में भोला पन क्यों होता है? बच्चों को चीजें देखते हुए देखना कभी। हमारे और बच्चों के देखने में बहुत फर्क है। हमारा देखना चीज में भी किसी और चीज को देखना है। हम हर समय कुछ खोज रहे हैं व बच्चा सिर्फ देख रहा है। उसे जो जैसा दिखाई पड़े, वो वैसा ही सही है। उसकी उस पर कोई खोज नहीं है। उसकी आंख घूम रही है और देख रही है। उसकी कोई पकड़ नहीं कि फलां चीज देखनी ही है। वह यह भी नहीं चाहता कि फलां चीज दिखे तो ऐसी दिखे। वह जो भी देख रहा है, बस वही ठीक है। इस बात को ऐसे भी कहा जा सकता है कि बच्चे के देखने में कोई प्रयोजन - Purpose नहीं है। वह किसी भी प्रयोजन से नहीं देखता, इसी लिए उसकी आंखों में सदैव भोलापन है। बड़ों की आंख से भोलापन खो जाता है। क्योंकि बड़े की आंख में प्रयोजन आ जाता है। वह हर समय हर चीज को प्रयोजन से देखता है जी प्रेमियों।
जेब भरी हो तो यह आदमी और तरह से देखता है। जेब खाली हो तो और तरह से देखने लगता है। किसी से कुछ काम हो तो और तरह से देखता है और काम नहीं हो तो फिर और ही तरह से देखता है। आदमी के देखने तक में ही प्रयोजन घुसा रहता है। वह हर तरफ ही कुछ खोज रहा है। महापुरुष यह फरमाते हैं कि अगर तुम्हारे देखने में कोई भी प्रयोजन है, कोई भी आकांक्षा है, देखने में अगर कहीं भी तुम्हारा मन है तो तुम्हारा देखना विकृत हो जाता है। ध्यान रहे कि बिना मन के देखना ही देखने की परम स्थिति होती है। उसमें फिर बच्चे जैसा भोलापन होगा। इसलिए बिना मन के ही देखना चाहिए । See without the mind. फरमाते हैं कि सब प्रयोजन, सब भय, इच्छाएं व वासनाएं तुम्हारे मन में ही इकट्ठी होती हैं। इसलिए तुम्हारा भोला पन खो जाता है। भोला पन खोकर तुम मन से सतगुरु का सत्संग, सेवा, सुमिरन, भजन ध्यान कैसे करोगे जी दयालु गुरमुख प्रेमियों?
दासनदास की सप्रेम जय सच्चिदानंद जी।
प्रेम, ध्यान, आनंद व सत्संग की बात-
Dil Ki Baat Satsang Ke Saath
🚩From Shri Prayag Dham🚩