Shahid Akhtar

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14/07/2023
23/04/2020

#पार्ट_3_हिन्दू_धर्म_के_ईश्वरीय_ग्रन्थ

#स्वर्ग_नरक_के_बारे_में_ऋग्वेद_में_है_कि :-

★ 1 पापियों के लिए अत्यंत गहरी खाई (नर्क)
बनाई गई है ( ऋग्वेद 4 - 5 - 5 )

★ 2 पाक ( शुद्ध ) और निष्पाप लोगों के लिए (स्वर्ग ) है शुद्ध होने के बाद जो ( नया ) शरीर उन्हें प्राप्त होगा उसमें हड्डियां नही रहेंगी उनके शरीर को आग नही जलाती और ज्ञान प्राप्ति के पशचात वह प्रकाशमयी दुनिया मे प्रवेश करेगा । स्वर्ग की दुनिया में उनके लिए बहुत आनन्द (pleasure ) है
( अथर्ववेद 4 - 34 - 2 )

★ 3 तुमहारे अनुयायी ईश्वर की प्राथना उदार ह्रदय से करेंगे और तुम्हे स्वर्ग में आनन्द प्राप्त होगा ।
( ऋग्वेद 10 - 95 - 18 )

★ 4 अपनी सत्यनिष्ठा और करुणामय स्वभाव के कारण तुम वह स्थान देखोगे जो अत्यंत विस्तृत स्थल है
( ऋग्वेद 1 - 21 - 6 )

नोट :- आचार्य सयान के अनुसार अत्यंत गहरी खाई क
का अर्थ नर्क है ।
और :- अत्यंत विस्तृत स्थल का अर्थ स्वर्ग है ।।।

#मरने_के_पशचात_के_विषय_में_ऋग्वेद_में_है_कि::-

★ 1 जैसे शैतान पुराने ज़माने से है उसी प्रकार पुर्नजन्म की बात भी पुराने ज़माने से लोग कहते आये है ।
पुर्नजनम जैसे ग़लत श्रद्धा ( Wrong Belief ) रखने वाले गुनाह गार लोगों पर हावी हो जाव उनको ( मगलूब ) ( Supress ) करो ।
मृत्य की देवी उम्र कम कर रही है ।
( अर्थात आवागवन पर लोगों का विश्वाश प्राचीन काल से है मगर यह गलत है इसे रोको और जल्दी करो , ज़िन्दगी का वक़्त खत्म होता जा रहा है ।
( मासिक पत्रिका कांति 8 / 7 / 1969- ऋग्वेद 1 - 92 - 10 )

★ 2 वो क़यामत को भुलाकर और ज्ञान और बुद्धि को हकारात से ठुकरा कर ( Neglectas Useless thing ) हमारे तय किये हुए हद ( Boundry ) को फलांग रहे है । ( ऋग्वेद 1 - 4 - 3 )
यानी क़यामत (प्रलय ) को और मरने ( मुर्त्य ) के बाद के जीवन को ग़लत कहना ईश्वर के कानून को तोड़ने के बराबर है ।।

★ 3 अपने दिल के लिए मीठी ज़बान प्राप्त करके लोग अपने शंकाओं को गिनते है ( ऋग्वेद 1 - 44 - 3)
अर्थात लोग ईश्वर का ज्ञान पाकर अपने गुनाहों को गिनते है या पाप न हो इससे बचने की कोशिश करते है

★ 4 देवताओं का इनकार करने वाले लोगों से कहो तुम्हे अमर जीवन मिलता निशचित है ।
( ऋग्वेद 1 - 44 - 6 )
नोट :-
( ऊपर लिखे अनुवाद पण्डित दुर्गा शंकर सत्यर्थी के है
Published in kanti july 1989 )

पार्ट 4 जारी ....

18/04/2020

पार्ट_2_हिन्दू_धर्म_के_ईश्वरीय_ग्रन्थ !!

हम हिन्दू धर्म के ईश्वरीय ग्रंथ को कैसे पहचाने ?
चार ग्रंथो को उनके मानने वाले ईश्वरीय ग्रन्थ स्वीकार करते है ।

★ वो है ,!
★ पवित्र कुरआन ,पवित्र तौररात (बाईबिल) , पवित्र ज़बूर ,और , पवित्र इंजील इन चार गर्न्थो में ईश्वर द्वारा स्वर्ग ,नरक ,प्रलय,(क़यामत) तथा मरने के बाद के जीवन का एक समान विवरण है । और इन सभी गर्न्थो में 70 प्रतिशत एक समान धर्मीक शिक्षा है ।।

★ इसी आधार पे यदि हम हिन्दू धर्म के गर्न्थो का अध्ययन करें तो ऋग्वेद और अन्य वेदों में , भी हमे इश्वर स्वर्ग, नरक, प्रलय ,(क़यामत ) तथा मरने के बाद के जीवन का वैसा ही वर्णन मिलता है ।
जैसा पवित्र कुरआन, बाईबिल, तौरात में मिलता है ।
और भारती लोग भी वेदों को आदि ज्ञान , आदि ग्रन्थ , अपुरुषी मानते है इसलिए हम ऋगवेद को ईश्वरीय ग्रन्थ मान लेते है ।

#उदाहरणतय :-

#ईश्वर_के_बारे_में_ऋग्वेद_में_है_कि :-

★ 1 "हे ईश्वर में आस्था रखने वालों , उस ईश्वर के सिवाय किसी और कि पूजा न करें , ईश्वर केवल एक ही है ।: ( ऋगवेद 8 - 1 - 1 )

★ 2 " ईश्वर ही पृथ्वी और आकाश का निर्माणकर्ता (मालिक) है ।: (ऋगवेद 1 - 19 - 7 )

★ 3 " हे ईश्वर ! तू ही पहला है और तू ही आख़िरी है तथा सवर्ज्ञानी है । " (ऋगवेद 2 - 31 - 1)

★ 4 "हे ईश्वर ! तेरा ही प्रत्येक वस्तु पर नियंत्रण है :।
( ऋग्वेद : 2 - 19 - 10 )

★ 5 "या देवष्विधि देव की आसीत ।
( ऋगवेद 10 - 121 - 08 )
जो (ईश्वर ) समस्त देवों का एक देव है ।

★ 6 " न तस्य प्रतिमा असित " ( यजुरवेद 10 - 71 - 4 )
उस परमेश्वर की कोई प्रतिमा नही है ।
पार्ट 3 जारी.......

16/04/2020

#पार्ट_1_हिन्दू_धर्म_के_ईश्वरीय_ग्रन्थ ।👏

भारती लोग सारे विश्व मे अपनी मेहनत , ईमानदारी उच्च शिक्षा, और शराफत के लिए जाने जाते है ।
इसलिए अमेरिका के नासा ( National of Aeronautic & Space Organisation of America ) में 35% वैज्ञानिक भारती है ।
और यही कारण है कि अमेरिका , जर्मनी , कनाडा , ऑस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड , इत्यादि में नय शहरियों में भरती लोगों की प्रथिमिकता दी जाती है ।

#लेकिन_ये_भी_सत्य_है ।

★ इस महान देश में भी अनेक पैग़म्बर आये है
और उनके पवित्र ग्रंथ भी है ।
★ लेकिन बदकिस्मती से उनका धर्मीक ज्ञान साधारण लोगों तक पहुचने नहीं दिया और लोगों में बहुत सारी बाधाएं डाली गई । इसलिए जैसे जैसे काल गुजरता गया साधारण लोगों का दोनों ( पैग़म्बर और ईश्वरी ग्रंथ ) से सम्बंध टूटता गया और वो उसकी पहचान भूल गए ।

★ सन 1800 ईसवी तक वेद लिखित रूप में नहीं थे ।
इसे प्रोहित समाज के लोगने ज़बानी याद ( memorise ) कर रक्खा था । धर्मीक ज्ञान पर प्रोहित समाज का पूरा कब्ज़ा था । और केवल उन्ही को धर्मीक ज्ञान सीखने का अधिकार था ।
उनके अतिरिक्त समाज के अन्य लोगों को धार्मीक ज्ञान सीखने का अधिकार नही था ।

★ धर्मीक ग्रंथ लिखित रूप में न होने के कारण समाज के दूसरी जाति के लोग खुद से भी इसका ज्ञान प्राप्त नही कर सकते थे !
भारत मे प्रोहित समाज की संख्या केवल 5 प्रतिशत है।
लेकिन इस प्रोहित समाज की Social Security System , इतनी ज़बरदस्त थी कि 3000 वर्षों तक हर धार्मिक बातों पे उनका पूरा नियंत्रण रहा ।

आज प्रोहित समाज हर मामले में सक्षम है तो उनको 95 प्रतिशत समाज के जो धर्म ज्ञान और पैगम्बरों की पहचान भूल गए है उनका धर्मीक बहुत बड़ा नुकसान हुआ है ।।

ुग_मे_प्रोहित_समाज_पूजा_पाठ_पे_आर्थिक_रूप_से_निर्भर_नही_है ।

#तो_उनको_धर्म_का_सत्य_ज्ञान_लोगों_तक_पहुचाने_का_प्रयास_करना_चाहिए ।

पार्ट 2 जारी ,,,,,,

Surat No 3 : Ayat No 140 اِنۡ یَّمۡسَسۡکُمۡ قَرۡحٌ فَقَدۡ مَسَّ الۡقَوۡمَ قَرۡحٌ مِّثۡلُہٗ ؕ وَ تِلۡکَ الۡاَیَّامُ نُدَا...
17/03/2019

Surat No 3 : Ayat No 140

اِنۡ یَّمۡسَسۡکُمۡ قَرۡحٌ فَقَدۡ مَسَّ الۡقَوۡمَ قَرۡحٌ مِّثۡلُہٗ ؕ وَ تِلۡکَ الۡاَیَّامُ نُدَاوِلُہَا بَیۡنَ النَّاسِ ۚ وَ لِیَعۡلَمَ اللّٰہُ الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا وَ یَتَّخِذَ مِنۡکُمۡ شُہَدَآءَ ؕ وَ اللّٰہُ لَا یُحِبُّ الظّٰلِمِیۡنَ ﴿۱۴۰﴾ۙ

अगर तुमको कोई ज़ख़्म पहुँचे तो दुश्मन को भी वैसा ही ज़ख़्म पहुँचा है, और हम इन दोनों को लोगों के दरमियान बदलते रहते हैं;
ताकि अल्लाह ईमान वालों को जान ले और तुम में से कुछ लोगों को गवाह बनाए, और अल्लाह ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता।

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23/07/2018

अगर अब भी न जागे तो ?
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सुन्नी होकर ये सुन्नीयत को बदनाम करते है ,,
अब तो ये लोग मसलके दौलत पे काम करते है,,
हर बात में फतवा लगाना काम रह गया है इनका,
अब तो ये संघी भी मेरा जीना हराम करते है,,....वाह रे नासमझ मुसलमान!
क्या ईमान पाया है, चन्द ज़ाहिल आलिमों के चक्कर में अल्लाह का कलाम (क़ुरान ए पाक) को जाने अनजाने में मानने से इन्कार करना शुरू कर दिए...?
ये हक़ीक़त दुनिया जानती है कुछ ज़ाहिल टाईप आलिम बड़े शान से उस हदीस के मफ़हूम को जिससे रिवायत है "मुसलमानों के 73 फ़िरके होंगे" को आम कर के अपने फ़िरके की दुकान चमका रहे हैं.
लेकिन क्या उन ज़ाहिलो नें कभी क़ुरान की दलील इन आयतों पर दी है?
"सब मिल कर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लो और फिर्क़ों में मत बटो..(सुर: आले इमरान-103)
"तुम उन लोगो की तरह न हो जाना जो फिरकों में बंट गए और खुली-खुली वाज़ेह हिदायात पाने के बाद इख़्तेलाफ़ में पड़ गए, इन्ही लोगों के लिए बड़ा अज़ाब है...(सुर:आले इमरान -105)
"जिन लोगों ने अपने दीन को टुकड़े टुकड़े कर लिया और गिरोह बन गए, आपका (यानि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का) इनसे कोई ताल्लुक नहीं, इनका मामला अल्लाह के हवाले है, वही इन्हें बताएगा की इन्होंने क्या कुछ किया है.. (सुर: अनआम-159)
"फिर इन्होंने खुद ही अपने दीन के टुकड़े-टुकड़े कर लिए, हर गिरोह जो कुछ इसके पास है इसी में मगन है..(सुर: मोमिनून -53) "
"तुम्हारे दरमियान जिस मामले में भी इख़्तेलाफ़ हो उसका फैसला करना अल्लाह का काम है..(सुर: शूरा -10)
"अल्लाह ने पहले भी तुम्हारा नाम मुस्लिम रखा था और इस (क़ुरआन) में भी (तुम्हारा यही नाम है) ताकि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम पर गवाह हों...।" (सुर: हज -78)
"बेशक सारे मुसलमान भाई भाई हैं, अपने भाइयों में सुलह व मिलाप करा दिया करो और अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाये...।" (सुर: हुजरात -10)

और जिस हदीस के मफ़हूम को इतनी मेहनत से नफ़रत फ़ैलाने में इस्तमाल करते हैं क्या कभी उस मफ़हूम को पूरा पढ़ के सुनाया इन ढोंगी मौलवीयों ने? जो पुरी तरह है
"मेरी उम्मत के 73 फ़िरके होंगे, पर तुम उन फ़िरकों में मत बंट जाना" और सिर्फ़ पहली लाईन को पकड़ के फ़िरकों में बांटने की ठेकेदारी कर रहे चन्द उलेमाओं ने यह भी नहीं बताया की क़ुरान की एक भी बात को न मानना कुफ्र है...
तो ज़रा सोचिये और बताईये फ़िरकों के नाम पर लड़ने वाले लोग ऊपर दी गई आयतों को कितना मानते हैं ????
मैं इतना बड़ा आलिम तो नहीं हूँ लेकिन अल्हमदुलिल्लाह मैं क़ुरान की इन आयतों के हवाले से कहता हूँ मैं मुसलमान हूँ और मेरा कोई फ़िरका नहीं है...
अब आप सोंचे आपको फ़िरकों में बंट के क़ुरान की नाफ़रमानी करनी है या उन कठमुल्लों का बायकाट करना है जो फ़िरकों में बांटने की राजनीति करते हैं...
...शाहिद अख़्तर
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