18/04/2020
पार्ट_2_हिन्दू_धर्म_के_ईश्वरीय_ग्रन्थ !!
हम हिन्दू धर्म के ईश्वरीय ग्रंथ को कैसे पहचाने ?
चार ग्रंथो को उनके मानने वाले ईश्वरीय ग्रन्थ स्वीकार करते है ।
★ वो है ,!
★ पवित्र कुरआन ,पवित्र तौररात (बाईबिल) , पवित्र ज़बूर ,और , पवित्र इंजील इन चार गर्न्थो में ईश्वर द्वारा स्वर्ग ,नरक ,प्रलय,(क़यामत) तथा मरने के बाद के जीवन का एक समान विवरण है । और इन सभी गर्न्थो में 70 प्रतिशत एक समान धर्मीक शिक्षा है ।।
★ इसी आधार पे यदि हम हिन्दू धर्म के गर्न्थो का अध्ययन करें तो ऋग्वेद और अन्य वेदों में , भी हमे इश्वर स्वर्ग, नरक, प्रलय ,(क़यामत ) तथा मरने के बाद के जीवन का वैसा ही वर्णन मिलता है ।
जैसा पवित्र कुरआन, बाईबिल, तौरात में मिलता है ।
और भारती लोग भी वेदों को आदि ज्ञान , आदि ग्रन्थ , अपुरुषी मानते है इसलिए हम ऋगवेद को ईश्वरीय ग्रन्थ मान लेते है ।
#उदाहरणतय :-
#ईश्वर_के_बारे_में_ऋग्वेद_में_है_कि :-
★ 1 "हे ईश्वर में आस्था रखने वालों , उस ईश्वर के सिवाय किसी और कि पूजा न करें , ईश्वर केवल एक ही है ।: ( ऋगवेद 8 - 1 - 1 )
★ 2 " ईश्वर ही पृथ्वी और आकाश का निर्माणकर्ता (मालिक) है ।: (ऋगवेद 1 - 19 - 7 )
★ 3 " हे ईश्वर ! तू ही पहला है और तू ही आख़िरी है तथा सवर्ज्ञानी है । " (ऋगवेद 2 - 31 - 1)
★ 4 "हे ईश्वर ! तेरा ही प्रत्येक वस्तु पर नियंत्रण है :।
( ऋग्वेद : 2 - 19 - 10 )
★ 5 "या देवष्विधि देव की आसीत ।
( ऋगवेद 10 - 121 - 08 )
जो (ईश्वर ) समस्त देवों का एक देव है ।
★ 6 " न तस्य प्रतिमा असित " ( यजुरवेद 10 - 71 - 4 )
उस परमेश्वर की कोई प्रतिमा नही है ।
पार्ट 3 जारी.......