24/01/2026
इन दिनों बेलहर नगर पंचायत में श्री राम कथा का आयोजन किया गया हैं इस कथा में अयोध्या धाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य धनंजय जी महाराज पधारे हैं महाराज जी ने कई बिंदुओं पर चर्चा की लेकिन इनमे समाज मे फैले वैमनस्य को कैसे दूर किया जाए यह प्रमुख था l
महाराज जी ने कहा कि
किसी भी समाज की असली ताकत उसकी संख्या में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, आपसी विश्वास और साझा मूल्यों में होती है। जब लोग अपने मूल आदर्शों को समझते हैं और उन्हें जीवन में उतारते हैं, तभी सच्ची एकता जन्म लेती है।
भारतीय परंपरा में सदियों से ऐसे विचार रहे हैं जो समाज को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।
“वसुधैव कुटुम्बकम्” — पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
“सर्वे भवन्तु सुखिनः” — सब सुखी हों।
ये सिर्फ श्लोक नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का आधार हो सकते हैं।
एकता नारे से नहीं आती, व्यवहार से आती है।
जब समाज का हर व्यक्ति —
ईमानदारी को अपनाता है
दूसरों के सम्मान को प्राथमिकता देता है
स्त्री, गरीब, दलित, वंचित — सबको समान दृष्टि से देखता है
तभी समाज मजबूत बनता है। ऊँच-नीच, भेदभाव और अहंकार एकता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
महाराज जी ने कहा कि
धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में “सेवा” को सर्वोच्च माना गया है।
अगर लोग मिलकर —
गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करें
गाँवों में स्वच्छता अभियान चलाएँ
पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ लगाएँ
जरूरतमंदों के लिए रक्तदान या भोजन सेवा करें
तो दिल अपने आप जुड़ते हैं। सेवा वह भाषा है जिसे हर इंसान समझता है।
आचार्य श्री ने कहा कि
कई बार विभाजन अज्ञान से पैदा होता है।
जब लोग अपनी संस्कृति के असली मूल्यों — करुणा, धैर्य, सत्य, सहिष्णुता — को समझते हैं, तब कट्टरता की जगह समझदारी आती है।
युवाओं को इतिहास का गौरव तो जानना चाहिए, पर साथ ही यह भी समझना चाहिए कि आधुनिक समाज समानता और न्याय पर चलता है।
एकता किसी मंच से नहीं, घर से शुरू होती है।
बच्चे वही सीखते हैं जो बड़े करते हैं।
अगर घर में — सम्मान, अनुशासन, बड़ों का आदर, छोटों से स्नेह
ये संस्कार होंगे, तो वही समाज में दिखेगा।
जब कोई समुदाय अपने मूल्यों पर गर्व करता है, तो उसका कर्तव्य और बढ़ जाता है —
कि वह समाज में शांति, सहयोग और नैतिकता का उदाहरण बने।
कथा व्यास आचार्य जी ने कहा कि
सच्ची सामाजिक एकता तब बनेगी जब लोग अपने आदर्शों को दूसरों पर थोपने के बजाय खुद जीना शुरू करेंगे।
एकता का रास्ता है —
सेवा + समानता + संस्कार + संवेदनशीलता
जब समाज का हर व्यक्ति सोचे —
“मैं क्या पा रहा हूँ” से पहले “मैं क्या दे रहा हूँ”
तभी एक मजबूत, जागरूक और संगठित समाज खड़ा होता है।
इस मौके पर वहां मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए मुख्य रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष टुनटुन राय डॉक्टर पांडे वरिष्ठ पत्रकार प्रेम राय जी अनिल राय जी सर्वेश राय मंटू राय जी अनुराग पांडे इत्यादि लोग मौजूद रहे l