06/06/2016
आतंक विरोधी युवा मोर्चा (प्रस्तावित)
गठन हेतु बैठक
हमारे देश के सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी संगठन ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’’ के तत्वाधान में दिनांक 14.05.2016 को ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’’ कार्यालय 606 ब्लॉक वन डीडीए फ्लॅट के कार्यालय में आतंकवाद विरोधी युवा संगठन के गठन हेतु एक बैठक आयोजित की गयी जिसमें बतौर मुख्य प्रेरक के रूप में परम आदरणीय श्री इन्द्रेश कुमार जी ने मार्गदर्शक किया उन्हीं के आहवान पर इस बैठक का आयोजन किया गया था।
उपरोक्त बैठक का मुख्य एजेन्ड़ा था कि देश में आतंकवाद के खिलाफ जनमत को एकजुट व प्रभावी बनाने में सभी प्रकार की आतंकवादी शक्तियों को नेस्तानाबूद करने के उद्देश्य से एक बहुस्तरीय व पहले कार्यरत संगठनों का परिसंघ के रूप में आतंकवादी विरोधी युवा संगठन का गठन करना।
बैठक में विभिन्न राज्यों से आये विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस ज्वलन्त समस्या पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला व सुझाव पेश किये। अधिकांश वक्ताओं का मत था कि देश में आतंकवादियों की बढ़ती हुई गतिविधियों पर लगाम कैसे लगाई जाये और युवाओं की प्रतिभा व उनके बाढ़ रूपी क्रोध पर बांध बनाकर देश में रोशनी फैलाई जाये मुख्य अतिथि के रूप में देश के प्रसिद्ध वि`द्धान बुद्धिजीवी ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) के ओजिस्वी के राष्ट्रीय संरक्षक जनाब अली जनाब इन्द्रेश कुमार जी ने अपने ओजस्वी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवाद के नाम पर हमारे देश में युवाओं खासतौर पर मुस्लिम युवा वर्ग को बरगलाया जा रहा है और इस्लाम मजहब को बदनाम किया जा रहा है। दिशाहीन युवाओं को देश की मुख्य धारा से जोड़ना और जागरूक करना देश के सामने एक बड़ी चुनौती है पिछली सरकारों ने जिस तरह निर्दोष नवयुवकों को आतंकवाद के नाम पर जेलों की काल कोठरियों में डलवाया आज 14-15 वर्ष बाद माननीय न्यायालयों द्वारा बरी किया गया। आज भी निर्दोष युवा वर्ग जेलों में पड़े हुए है जिनको न्याय दिलाया जाये व एक आतंक विरोधी युवा मोर्चे का गठन होना नितान्त आवश्यक है। देश में अराजकता फैलाने वाली कुछ ध्वंसनात्मक शक्तियाँ चाहती है कि इस्लाम और आतंक को पर्यायवाची बना दिया जाये। यदि हमें असाधारण परिणाम प्रांप्त करना है तो हमें असाधरण प्रतिभा वाले अच्छे लोगों को तलाश करना पड़ेगा जिनके नजरियें जबरदस्त व सकारात्मक हो क्योंकि यह एक टीम वर्क है जब प्रतिभा और नजरिये पर उठते है तो टीम भी सफल होती है। हम आज इस युवाओं का आतंकवाद विरोधी मोर्चा गठित करने पर विचार विमर्श कर रहे है हमें हताशाजनक परिस्थितियों में भी अपने मनोबल को ऊँचा रख है। तब ही हमें सकारात्मक परिणाम मिलेगें और हम अपने मकसद में कामयाब रहेगें। इसलिये जीत या हार की परवाह न करते हुये हमेशा संघर्ष करने के लिए तैयार रहे। आज देश का युवा वर्ग सचेत हो चुका है। विशेषकर मुस्लिम युवा वर्ग दुनिया में दूसरे नम्बर पर मुस्लिम आबादी भारत वर्ष में है परन्तु इतने बड़े देश की इतनी बड़ी आबादी में केवल दो या तीन दर्जन लोग आई0एस0आई0एस0 के जाल में फंसे है और यह आतंकी संगठनों के मुँह पर तमाचा है और उनकी करारी हार है। इसलिये देश की अखण्डता व एकता को बचाने के लिए एक आतंक विरोधी युवा मोर्चा बनाने की अत्यन्त आवश्यकता है।
बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में मादरे वतन समाचार पत्र के मुख्य सम्पादक व मुस्लिम राष्ट्रिय मंच के राष्ट्रिय संगठन संयोजक श्री गिरीश जुयाल जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम जनाब इन्द्रेश कुमार जी जो हमारे मार्गदर्शक है उनके इस प्रयास की सराहतना करते है कि उन्होनें मंथन करके अमृत रूपी विचार किया कि देश के युवाओं के आक्रोश को और अस्थिरता को समाप्त करने हेतु युवाओं का एक आतंकवादी विरोधी मोर्चा गठित किया जाये और युवाओं को कर्मवीर बनाया जाये हम उनके इस जज्बे को सलाम करते है और तन मन धन से उनके साथ है।
गिरीश जुयाल राष्ट्रीय संगठन संयोजक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चीफ एडिटर पैगाम मादरे वतन' उर्दू अखबार ने आतंक विरोधी नीतियों और कदमों पर विचारों का आदान प्रदान किया आतंकवाद का मूल कारण मनुष्य के मन में पल रहे स्वार्थ और लोभ जैसी पशुताएँ हैं और इनको दूर किए बिना इस विश्वव्यापी समस्या का निराकरण नहीं है। एक जनसंख्या का आर्थिक हानि,आतंकवादी हमलों में अक्सर डर और प्रचार को अधिकतम करने के लिए लक्षित कर रहे हैं। साइबर आतंकवाद, तनाव की रणनीति, राष्ट्रवादी-अलगाववादी, धार्मिक कट्टरपंथी नई धार्मिक सामाजिक क्रांतिकारी राजनीती, सामाजिक और आर्थिक असमानता, उच्च बेरोजगारी, अर्थव्यवस्थाओं ठंड, अतिवाद (Extremism) जातीय संघर्ष (Ethnic conflict) धार्मिक संघर्ष (Religious conflict) प्रादेशिक संघर्ष (Territorial conflict) ऊँचा जनसंख्या वृद्धि (population growth) दरें देश में हर रोज हजारों की संख्या में बांग्लादेशियों की घुसपैठ हो रही है, इस रोक लगना चाहिए। इससे निपटने के लिए आतंक विरोधी कानून का सख्ती से पालन हो।अलगाव (Secession) एक क्षेत्र की एक नई संप्रभु राज्य बनाने के लिए कम्युनिष्ट विचार धारा के लोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में रहते हैं शामिल आज जरूरत है देश में छद्म वेश में छिपे ताड़का, सुबाहु व मारीच अर्थात् आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाने की, जो विदेशों में बैठे लादेन, दाऊद, आई.एस.आई. रूपी रावण को समझा सकें कि भारत से वैर लेने का साहस न करें। आतंकी हमलों का न्यूज चैनल्स पर लाइव कवरेज करने से ना केवल ऑपरेशन की गोपनीयता और प्रभावशीलता पर असर पड़ता है, बल्कि सुरक्षा बलों, आम जनता और पत्रकारों को भी नुकसान हो सकता है।कुपवाड़ा और अनंतनाग में दो आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों के दौरान सेना को कई दिक्कतों का उस समय सामना करना पड़ा जब पत्थरबाजों ने उनके उन जवानों पर पथराव आरंभ कर दिया था, जिन्होंने 6 से अधिक आतंकियों को अपने घेरे में ले रखा था और वे उन्हें लगभग ढेर ही कर चुके थे। ‘पर पत्थरबाजों पर सयंम बरतने के कारण पिछले 4 महीनों में 30 से अधिक आतंकी इन पत्थरबाजों की ‘मेहरबानी’ के कारण अभियानों के दौरान बच निकलने में कामयाब रहे आतंक विरोधी ऑपरेशन में कामयाब नहीं हो पाए,’आतंकियों के विरुद्ध चलाए जाने वाले ऑपरेशनों के दौरान पत्थरबाजों द्वारा जवानों पर पत्थरबाजी कर आतंकियों को भागने में सहायता करने की स्थानीय लोगों की रणनीति से परेशान सेना ने अब राज्य सरकार से कहा है कि अगर वह इन पत्थरबाजों की लगाम नहीं कसती है तो वे मजबूरन इन अभियानों में शिरकत नहीं करेंगे।आतंकवाद की हर घटना के बाद दूसरों को जिम्मेवार, ठहराने, ओछी राजनीति करने, आतंकवाद से सख्ती से निपटने की औपचारिक घोषणा करने वाले भारत के राजनेता अपनी इस विरासत से मार्गदर्शन लें।आतंकवाद के कृत्यों किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. उद्धेश्य आम जन में आतंक के प्रति जागरूकता पैदा करना पुलिस और प्रशाशन का सहयोग करना व्यपारिक संघो , धार्मिक स्थलों , मॉल्स सिनेमाघरों के पदाधिकारियों से लगातार विचार विमर्श करना और समयानुसार व आवश्यकतानुसार सुरक्षा के इन्तेजामों का जायजा लेना और सुरक्षा साधनों की व्यवस्था करना प्रमुख मार्गो व राष्ट्रीय राज मार्गो पर सीसी टीवी कैमरा का प्रयोग करना सुरक्षा सम्बन्धी एजेंसियों सेना के पदाधिकारियों , पुलिस व प्रशाशनिक अधिकारीयों के मार्ग दर्शन में समय समय पर संघोष्ठिया करना व उनके द्वारा सुझाये गए कार्यक्रमों का किर्यन्वन करना विद्यालयो एवं महाविध्यलायो के प्रधानाचार्यों के सानिध्य में विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति सवेदनशील एवं जागरूक करना ग्रामीण क्षेत्रो के थानाधिकारियों तहसीलदार ग्राम प्रमुख सरपंच इत्यादि को सुरक्षा सम्बंधित जानकारी देना एवं जागरूक करना मॉल्स सिनेमाघरों एवम भीडभाड वाले क्षेत्रो में सुरक्षा के प्रति लापरवाही दिखानेवालों को समझाना और पुलिस एवं प्रशाशन को उसके बारे में अवगत करना।
बैठक को मुस्लिम राष्ट्रीय संयोजक जनाब अफजाल जी ने भी सम्बोधित किया और आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी के इस जज्बे की सराहना की।
बैठक को राष्ट्रीय मुस्लिम स्वयं सेवक मिशन की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती शाहीन परवेज एडवोकेट ने भी सम्बोधित किया और कहा कि मैंने परम आदरणीय जनाब इन्द्रेश कुमार जी को बड़े ध्यानपूर्वक सुना और मैं उनके इस प्रयास और सोच की कायल हो गयी कि देश का युवा वर्ग अपने बारे में मंथन नहीं कर पा रहा। हमारे देश में परम आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी गिरीश जुयाल जी व अफजाल जी जैसे विद्धान है जो देश के युवा वर्ग के बारे में देश की अखण्डता एकता के बारे में मंथन कर रहे है मैं इनके इस प्रयास की सराहना करती हूँ और समर्थन और समर्पण देने को तैयर हूँ और ह्नदय से चाहती हूँ कि दिशाहीन युवाओं और उर्जावान युवाओं को दिशा देने हेतु आतंकवादी विरोधी मोर्च का गठन जरूर होना चाहिये जिससे हमारा जीवन देश की सेवा में व्यतीत हो और देश के काम आये। आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी इनसानियत के फरिश्ते की तरह काम कर रहे है सभी 1.25 करोड़ हिंदुस्तानी अपनी व देश की तरक्की में समान भागीदार बन सकें और मानवता की सेवा कर रहे है। यह एक चुनौतीपूर्वक कार्य है। हम इस प्रयास की सराहना करते है।
बैठक में उपस्थित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आतंकवादी विरोधी युवा मोर्चा के गठन होने पर अपने-अपने आतंक विरोधी संगठनों की आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी द्वारा गठित मोर्चे में विलय या घटक बनने की घोषणा की।
उपरोक्त बैठक में काफी गणमान्य व्यक्ति ने भी हिस्सा लिया मुख्य रूप से फैज आलम रईस खान, डॉ नीराज (इंडिया अगेन्स्ट टेरीरिसम), गुरमीत, रफत अली, मौलाना सुहैब कासमी, डॉ इमरान चोधरी, खुर्सिद राजाका, अर्शद पोसवाल, डॉ पर्दुमन पांडे (जय भारत मंच), सम्राट, फारुख पोसवाल (जम्मू कश्मीर) एडवोकट श्रीमति शाहीन प्रवेश (मेरठ), कुमारी प्रतिभा उपस्थित रहे। बैठक को एडवोकेट यासिर जिलानी ने भी सम्बोधित किया -
बैठक में वक्ताओं की ओर से जो सुझाव लिये गये वह निम्नलिखितः-
1. राष्ट्रवादी सोच को युवाओं में जाग्रत करना तथा देश व समाज की सुरक्षा के लिए समय देने वाला बनाना।
2. युवाओं में साम्प्रदायिक वैमनस्य को समाप्त करने के प्रयास करना। सर्वपंथ संभाव को बढ़ावा देना।
3. बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं को दिनभ्रमित कर दिया है जिसके कारण शिक्षित बेरोजगार युवक भी आतंकवादियों से प्रभावित होकर उनके साथ आतंकी गतिविधियों में शामिल हो जाते है। देश के युवकों मे देश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पनपाना।
4. यह कि पिछले 67 वर्षो में आजादी के बाद से पिछली सरकारों द्वारा प्रस्ताविक विकास नहीं किया जिसके कारण युवा वर्ग अज्ञानता व पिछड़ापन के अंधेरों में भटकने लगा है। उस युवा वर्ग को भटकने से बचाना है। उसके लिये प्रयास किये जाये।
5. आतंकवाद के बढ़ने के कारणों का गहनता से अध्ययन कर उनके निराकरण का काम करना होगा।
कुछ सवालों पर हमे सोच विचार करना होगा।
1. हमें सगठन कैसे चलाना है?
2. क्या किया जा सकता है?
3. कैसे किया जा सकता है?
4. जो कुछ हम खो चुके है उसका जिक्र न करके अपने देश के निर्माण के लिये एक दृढ संकल्प करना होगा।
5. आतंकवादी गतिविधियों के विरूद्ध हम उनके सामने संगठित होकर डटे रहेगें तो उनका आत्म विश्वास डगमगा जायेगा।
6. संसाधनों का प्रबन्ध होना चाहिये।
7. देश में बढ़ती आतंकवादी गतिविधिया जम्मू-कश्मीर की वजह से निरन्तर बढ़ रही है क्योंकि सीमायें पूरी तरह सील नही है। धारा 370 की इसका एक मुख्य कारण है पाकिस्तान की तरफ से सीमाओं पर तैनात अर्द्धसैनिक बल, पुलिस और दूसरे सुरक्षा बल घुसपैठ नहीं रोक पा रहे है।
आतंकवादियों के पास आधुनिक हथियार है। उनसे मुकाबला करने के लिए क्या प्रबन्ध हो पायेगा?
हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान हमारे देश में अस्थिरता पैदा करता रहता है और जम्मू कश्मीर राज्य के द्वारा ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। 120 लाख कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी बन गये।
हमारा देश सबसे ज्यादा जम्मू कश्मीर की समस्याओं से जूझ रहा है। हाफिज सईद काश्मीर में बिना किसी रोक टोक के आवागमन करता है। युवाओं को भड़काता है, हथियार और पैसा बांटता हे। आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है और भारत देश के विरूद्ध बगावत का बिगुल बजवाया जाता है।
सबसे ज्यादा जम्मू कश्मीर राज्य में युवाओं का संगठन खड़ा करने की आवश्यकता है उसके पश्चात यू0पी0 में जो आतंकवादियों की शरण स्थली बना हुआ है। को आतंक शून्य करने के लिए योजना बनाए।
यू0पी0 और जम्मू कश्मीर में आतंक विरोधी युवा मोर्चे का गठन होना अति आवश्यक है। युवा वर्ग को जब आतंकवादी संगठन अपनी ओर आकर्षिक कर लेते है तो आखिर हम लोग उनके माइण्ड वाश क्यों नहीं कर सकते। उसके लिये मनोवैज्ञानिकों का भी एक पैनल बनाया जाये जो इस मोर्चे में काम करेगें उनकी सुरक्षा का प्रबन्ध कैसे होगा।
एक राष्ट्रीय टीम संगठन में कार्यरत युवाओं पर कोई कठिनाई आने पर सहायता करे। सरकारी तंत्र की भी सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी। बैठक के बाद उपस्थित सभी संगठन अपने-2 कार्यकर्ता की बैठक करेंगे व उनको इस बैठक के निर्णयों से अवगत कराकर शीघ्र ही पुनः उनके सुंझावों के साथ दुबारा बैठक करके इस राष्ट्र उपयोगी कार्य को लागू करेंगे।
आदिल इंद्रावी
कार्यालय प्रमुख
मुस्लिम राष्ट्रिय मंच