16/06/2021
🙏🏽 कृपया पूरा पढ़कर कोई निष्कर्ष पर जाये, भ्रम में न रहे
👉🏼490 वर्ष हम लड़े बाबर-अकबर-वक्फ बोर्डो से व उनकी औलादों से अब हमे इस राष्ट्र मन्दिर हेतु सँघर्ष करना पड़ रहा है घर के ही जयचंदो से।
👉🏼 खर दूषण व रावण की औलादे मात्र अपने निजी स्वार्थ हेतु आज भी मन्दिर रूपी इस राष्ट्र मन्दिर के हवन में विघ्न डालने हेतु खड़ी है।
*संजय सिंह को गिरफ्तार करो*
(हमारी भावना से खिलवाड़ न करे )
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*टिकट ब्लैकिया अपोला संजय सिंह पोल खुलते ही डिबेट से भाग गया*
ये टिकट ब्लैकिया अपोला संजय सिंह आज जी न्यूज पर एक्सपोज हो गया! इसने झूठ बोल कर करोड़ों हिन्दुओं को गुमराह किया साथ ही चंपत राय जी जैसे सन्यासी व्यक्ति पर घोटाला करने का लांछन लगाया! इस टिकट ब्लैकिये पर मानहानि का मुकदमा होना चाहिए और माफी नहीं सजा की मांग करनी चाहिये!!
ज़ी न्यूज की डिबेट में जो नये तथ्य पता चले वो इस प्रकार है:
◆ यह जमीन अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास है और भव्य राम मंदिर में सुविधाओं के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जमीन है!
◆ यह एक विवादित जमीन थी, जिन्होंने इस जमीन को हड़प रखा था वो इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड की जमीन बताते थे और इसपर केस चल रहा था!
◆ इस जमीन का 3 बार एग्रीमेंट हो चुका है! क्योंकि कुसुम पाठक मुकदमेबाजी से छुटकारा पाना चाहती थी, इसलिए उन्होंने इस जमीन को बेचने का निश्चय किया! बैनामा नहीं हो सका क्योंकि मुकदमा चल रहा था!
◆ पहला एग्रीमेंट 4 मार्च 2011 में 2 करोड़ रुपए में जमीन बेचने को लेकर सुलतान अंसारी के पिता इरफान अंसारी से हुआ था!
◆ दूसरा एग्रीमेंट 2014 में हुआ और तीसरा एग्रीमेंट सितंबर 2019 में हुआ था!
◆ जमीन की कीमत 2 करोड़ रूपये 2011 में ही तय हो चुकी थी!
◆ 2020 में इस जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा छोड़ दिया और कहा ये उसकी जमीन नहीं है! अर्थात इस विवादित जमीन पर मुकदमा 2020 में खत्म हुआ!
◆ वर्तमान में इस जमीन का सर्किल रेट (ये मिनिमम रेट होता है, जिसपर स्टैंप ड्यूटी देनी पड़ती है) लगभग 5 करोड़ रूपये है!
◆ उत्तरप्रदेश सरकार नई अयोध्या बनाने के लिए अयोध्या में जमीन को सर्किल रेट से 4 गुना कीमत पर खरीद रही है!
◆ यानी वो जमीन अगर उत्तरप्रदेश सरकार खरीदती तो 25 करोड़ के आसपास खरीदती!
◆राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए उस जमीन की आवश्यकता थी!
◆ राम मंदिर ट्रस्ट ने दोनो पक्षों यानी कुसुम पाठक और सुलतान अंसारी को बुलाया, बातचीत के बाद दोनो पक्षों में सहर्ष सहमति बनी!
◆ राम जन्मभूमि ट्रस्ट को उस जमीन का बैनामा करने से पहले 18 मार्च 2021 को निरस्तनामा दिया गया, यानी सारे एग्रीमेंट और सारी देनदारियां रद्द की गई! अब जमीन सभी विवादों और भारों से मुक्त हो चुकी थी!
*जो टिकट ब्लैकिया अपोला संजय सिंह भौंक रहा है की बैनामे में किसी एग्रीमेंट का जिक्र क्यों नहीं है, वो इसीलिए नहीं है*
◆उसी दिन 18 मार्च 2021 को सुलतान अंसारी द्वारा 2 करोड़ रुपया कुसुम पाठक को दिया गया!
◆ उसके बाद उसी दिन 18 मार्च 2021 को सुलतान अंसारी ने वो जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को मार्केट रेट से कम दाम पर यानी 18.5 करोड़ रूपये में बेच दी!
*अर्थात:*
एग्रीमेंट ऑफ सेल 2011 में ही हो चुका था!
2 करोड़ रुपया 2011 का रेट है जो तय हो चुका था!
वर्तमान में उस जमीन की मार्केट वैल्यू 20 से 25 करोड़ रुपया है!
राम मंदिर ट्रस्ट ने वो जमीन मार्केट रेट से कम में यानी 18.5 करोड़ में खरीदी है!
पूरी डील एक नंबर में हुई है! स्टैंप ड्यूटी चुकाई गई है!
इसमें घोटाला कहां से हो गया?
*ये कुछ नहीं टिकट ब्लैकिये अपोले संजय सिंह जैसे कलयुगी कालनेमियों द्वारा राम काज में विघ्न डालने का एक कुप्रयास मात्र है जिसे प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमानजी ने पुनः विफल कर दिया है*il
*जय जय श्री रामil*