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यदि आप रोमांच और ट्रैकिंग को पसंद करते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा स्थान है।ढोलकल गणेश का स्थान जिला दंतेवाड़ा से करीब...
25/09/2023

यदि आप रोमांच और ट्रैकिंग को पसंद करते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा स्थान है।

ढोलकल गणेश का स्थान जिला दंतेवाड़ा से करीब 13 किलोमीटर दूर फरसपाल गांव के पास बैलाडिला पहाड़ी में पर स्थित है। लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है यहां पर गणेश जी की एक प्राचीन मूर्ति रखी हुई है।

नवाखाई के गाड़ा गाड़ा बधाई अउ शुभकामनाए 🙏
23/09/2023

नवाखाई के गाड़ा गाड़ा बधाई अउ शुभकामनाए 🙏

आपको बता दे यह मंदिर साल में सिर्फ के बार ही खुलता है इसलिए यहां दर्शन करने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा होती है। हैरा...
21/09/2023

आपको बता दे यह मंदिर साल में सिर्फ के बार ही खुलता है इसलिए यहां दर्शन करने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा होती है। हैरानी वाली बात ये है कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं को रेंगकर दर्शन करने आना होता है।इस मंदिर में एक शिवलिंग है मान्यता है की यहाँ माता रूप में विराजित है। शिव व शक्ति के समन्वित स्वरूप को लिंगाई माता के नाम से जाना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में अगर खीरा चढ़ाने पर सभी मुरादें पूरी होती है। इसलिए मंदिर के बाहर बड़ी मात्रा में खीरा मिलता है और लोग भी यहां खीरे को प्रसाद के रूप में खाते हैं। अगर कोई विवाहित जोड़ा संतान की चाह रखता है तो वो भी यहां आकर खीरा चढ़ाता है। मंदिर के आसपास के क्षेत्र में सभी ओर बस खीरे की ही महक आती है। यह मंदिर काफी ज्यादा ऊंचाई पर है इसलिए यहां खड़े होकर दर्शन करना संभव नहीं होता है।

इस दिन मिट्टी और लकड़ी से बने बैल चलाने की भी परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी के अन्य खिलौनों की बच्चों द्वारा खेला जाता है।...
12/09/2023

इस दिन मिट्टी और लकड़ी से बने बैल चलाने की भी परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी के अन्य खिलौनों की बच्चों द्वारा खेला जाता है। मिट्टी या लकड़ी के बने बैलों से खेलकर बेटे कृषि कार्य तथा बेटियां रसोईघर व गृहस्थी की संस्कृति व परंपरा को समझते हैं। बैल के पैरों में चक्के लगाकर सुसज्जित कर उस के द्वारा खेती के कार्य समझाने का प्रयास किया जाता।
दरअसल पोरा पर्व कृषि आधारित पर्व है, लेकिन पोरा पर्व की धूम शहर से लेकर गांव तक रहती है। जगह-जगह बैलों की पूजा-अर्चना होती है। गांव के किसान भाई सुबह से ही बैलों को नहला-धुलाकर सजाते हैं, फिर हर घर में उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद घरों में बने पकवान भी बैलों को खिलाए जाते हैं।

इस दिन मिट्टी और लकड़ी से बने बैल चलाने की भी परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी के अन्य खिलौनों की बच्चों द्वारा खेला जाता है।...
12/09/2023

इस दिन मिट्टी और लकड़ी से बने बैल चलाने की भी परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी के अन्य खिलौनों की बच्चों द्वारा खेला जाता है। मिट्टी या लकड़ी के बने बैलों से खेलकर बेटे कृषि कार्य तथा बेटियां रसोईघर व गृहस्थी की संस्कृति व परंपरा को समझते हैं। बैल के पैरों में चक्के लगाकर सुसज्जित कर उस के द्वारा खेती के कार्य समझाने का प्रयास किया जाता है।
दरअसल पोरा पर्व कृषि आधारित पर्व है, लेकिन पोरा पर्व की धूम शहर से लेकर गांव तक रहती है। जगह-जगह बैलों की पूजा-अर्चना होती है। गांव के किसान भाई सुबह से ही बैलों को नहला-धुलाकर सजाते हैं, फिर हर घर में उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद घरों में बने पकवान भी बैलों को खिलाए जाते हैं।

प्रकृति बहुत ही सुंदर, इसका खयाल रखे....कोड़ाकल जलप्रपात, कुयेमारि, केशकालजिला- कोंडागांव (छ.ग.)
09/09/2023

प्रकृति बहुत ही सुंदर, इसका खयाल रखे....
कोड़ाकल जलप्रपात, कुयेमारि, केशकाल
जिला- कोंडागांव (छ.ग.)

और एक झरना बहुत शफ़्फ़ाक था,बर्फ़ के मानिन्द पानी साफ़ था।  mutyaladharawaterfall  chhattisgarh                         ...
29/07/2023

और एक झरना बहुत शफ़्फ़ाक था,
बर्फ़ के मानिन्द पानी साफ़ था।

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23/05/2023

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07/05/2023

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