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*वर्तमान संकट काल का कैसे करें सामना*http://www.medicalsansar.page/2020/05/vartamaan-paristhitiyon-ka-kai-xFUIdv.html*रा...
17/05/2021

*वर्तमान संकट काल का कैसे करें सामना*

http://www.medicalsansar.page/2020/05/vartamaan-paristhitiyon-ka-kai-xFUIdv.html

*राष्ट्रीय समाचार पत्र-मेडिकल संसार*

बुरहानपुर - कोरोना महामारी के इस विकट काल में जहाँ धार्मिक स्थलों तक को दर्शनार्थ बंद करवाया हुआ है,लोगों में महाम.....

28/11/2020
*-----विशेष साक्षात्कार----*वर्तमान परिस्थितियों का कैसे करें सामना -भागवत कथा वाचक पं. श्री लोकेश जी शुक्ल👉  संसार में ...
22/05/2020

*-----विशेष साक्षात्कार----*

वर्तमान परिस्थितियों का कैसे करें सामना -
भागवत कथा वाचक पं. श्री लोकेश जी शुक्ल

👉 संसार में जब कुछ भी नित्य नहीं तो यह कोरोना काल भी सदा रहने वाला नहीं
👉 चिन्ता और भय से रहित होकर धैर्य धारण करें

https://medicalsansar.page/article/vartamaan-paristhitiyon-ka-kais/xFUIdv.html
प्रधान संपादक - डॉ. मनोज अग्रवाल (9827251448)
राष्ट्रीय समाचार पत्र-मेडिकल संसार

संसार में जब कुछ भी नित्य नहीं तो यह कोरोना काल भी सदा रहने वाला नहीं चिन्ता और भय से रहित होकर धैर्य धारण करें एक की ...

15/04/2020

********महामारी*******
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एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो-बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा।
राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है!
अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी "पानी" डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे।
कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी।
राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है।
दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी।
राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।
दरअसल ऐसा इसलिये हुआ कि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला।
मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है।
जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं।
अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश में भी ऐसा बदलाव ला सकते हैं जिसकी आज ज़रूरत है।.........✍️

ऋग्वेद  मंडल १०:   १९१:२-३-४ऋग्वेद में परमात्मा का आदेश :प्रेम से मिलकर चलो बोलो सभी ज्ञानी बनो। पूर्वजों की भांति तुम क...
14/04/2020

ऋग्वेद मंडल १०: १९१:२-३-४
ऋग्वेद में परमात्मा का आदेश :
प्रेम से मिलकर चलो बोलो सभी ज्ञानी बनो।
पूर्वजों की भांति तुम कर्तव्य के मानी बनो ||
हों विचार समान सब के चित्त मन सब एक हो।
ज्ञान देता हूँ बराबर भोग्य पा सब नेक हो ||
हो सभी के हृदय और संकल्प अवरोधी सदा।
मन भरे हों प्रेम से जिस से बढ़े सुख सम्पदा ||
अस्तु ....

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मुँह में, नाँक में, कान में बार-बार उंगली डालने की कुटेव अशिष्टता/अभद्रता भी है, अपवित्रता/अस्वच्छता भी है और आरोग्य विघ...
13/03/2020

मुँह में, नाँक में, कान में बार-बार उंगली डालने की कुटेव अशिष्टता/अभद्रता भी है, अपवित्रता/अस्वच्छता भी है और आरोग्य विघातक (स्वास्थ्य के लिये भी बुरी) है l
Any impure secretion of the body;
वसा शुक्रमसृङ् मज्जा मूत्रविड् घ्राणकर्णविट् ।
श्लेष्माश्रुदूषिका स्वेदो द्वादशैते नृणां मलाः ।।
चर्बी, वीर्य, रक्त, मज्जा, मूत्र, विष्ठा, आंखों का कीचड़, नाक की गंदगी (nose mucus), कान का मैल (ear wax), कफ/थुक, पसीना - ये सभी मल कहे गए हैं l

Your nose and mouth will be there only pls don't touch them unwanted

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450331

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