20/02/2015
मेरा बैतूल - आपका बैतूल - हमारा बैतूल
बैतूल के आसपास की धरोहर को देखने की जिज्ञासा ही इस
विज्ञापन एड का एक कारण है। कुछ दिन तो मेहमान बन कर आओं
हमारे बैतूल में ....................
यहां पर मिलेगा आपको पुण्य सलिला सूर्यपुत्री ताप्ती एवं
चन्द्रपुत्री पूर्णा का अमृत रूपी जल, यहां पर मिलेगा आपको कुकरू
के सर्किट हाऊस और काफी का आनंद ....... यहां पर आप निहार
सकते है सूर्यास्त को......... यहां पर मिलेगा आपको अखण्ड भारत
का केन्द्र बिन्दु सेंटर पांइट बरसाली जहां पर अरबी में लिखा हुआ
राजा टोडरमल द्वारा लगवाया गया शिलालेख मौजूद है। बैतूल में
गुरू साहेब महाराज की समाधी पर भूतो का मेला, सारनी में
बाबा मठारदेव की पहाडियों से दिखता सतपुडाचंल
का सतपुडा थर्मल पावर स्टेशन...... यहां पर मिलेगा ग्राम
रोंढा का तीन सौ साल पुराना चम्पा का पेड और प्रदेश
का सबसे बडा सफेद संगमरमर का बैठा हुआ नंदी और शिव मंदिर,
भैसदेही में आपको चौदहवी शताब्दी के शिव मंदिर के
अलावा आपको छावल एवं धामनगांव में मां रेणुका धाम जहां पर
दिन में तीन रूप में
बदलती मां रेणुका आपको मिलेगी अपना आशिष देती हुई। यहां पर
पारसडोह में कपिल मुनि का आश्रम और पारस पत्थर
तथा शिवधाम बारहलिंग में बाबा भोलेनाथ के देश - दुनिया के
एक मात्र बारह द्धादश ज्योतिलिंग की पत्थरो पर ऊकेरी गई
आकृति मिलेगी। बैतूल में आपको सालबर्डी के पास पाण्डव
गुफायें, धारूल में आदि मानव की गुफाये, बैतूल जिले के पांच
पहाडी तथा एक मैदानी किला मिलेगा। खेरला राजवंश
का खेडला किला 35 परगनो का केन्द्र रहा है। यहां पर विवेक
सिंधु नामक मराठी के प्रथम ग्रंथ की रचना स्वामी मुकंदराज ने
की थी। आपको बैतूल में एक ऐसा गांव
मिलेगा जो बिना सरकारी मदद के ही पिछले लगभग सौ साल से
परिवार नियोजन के सिद्धांत हम दो हमारे दो का पालन कर
रहा है। यहां पर आपको पूर्णा की विहंगम घाटिया और ताप्ती के
गहरे खोह देखने को मिलेगें। रानी विक्टोरिया फाल और
रानी पठार तथा सूर्यमुखी ताप्ती के दर्शन भी हो सकते है। बैतूल
के आसपास में जैन तीर्थ स्थली मुक्तागिरी तथा सिखो के गुरू
नानक देव की वह गुरूद्धारा भी मिलेगी जहां पर संत गुरू नानक देव
ने चौदह दिनो तक रूक कर मुलताई में पुण्य
सलिला मां सूर्यपुत्री ताप्ती के उदगम स्थल पर जप - तप
किया था। आपको गोण्डो का इतिहास और उसके शौर्य
गाथा की झलक यहां पर मौजूद किलो एवं खण्डहरो में मिलेगी।
गोधना में चण्डी दरबार और राजा - रानी के दो बैठक हाल
भी मिलेगे। विदर्भ की राजकुमारी दमयंती और नल देश के
राजा नल की कहानी बयां करता मासोद का दमयंती तालाब।
हरदू में आपको मकडई रियासत की कुलदेवी और संत
तपश्री बाबा की कर्मभूमि भी मिलेगी। दीयादेव की टेकडी और
झापल की पहाडी जहां से पांच नदिया एक ही कुण्ड से अलग -
अलग दिशा में बहती हुई मिलेगी। क्या कुछ नही है बैतूल के आसपास
में लेकिन जरूरत है यहां पर कुछ दिन रूक कर बैतूल का पौराणिक एवं
पूर्व कालिन इतिहास को जानने
की आपकी अभिलाषा की.........
आइयें बैतूल आपका स्वागत करता है.......