Astrosahivgi

Astrosahivgi astrology and vastu

09/01/2019

ज्योतिष में बुध और जातक ================= बुध दिमाग है, चालाकी है, चतुराई है, पैसा है, सामाजिक तालमेल है, गणितबाज़ी है, वाणी है, घुटन देने वाला ज़हर है, शरीर को सुखा देने वाला है, कमज़ोर कर देने वाला है और वित्त मंत्री है | कुण्डली में जब बुध शत्रु ग्रह या उनकी राशी ( सुर्य, चन्द्रमा, ब्रहसपति, मंगल ) में होता है तो जातक को दिक्कत देता है, बेवझा धन हानि या फ़िर ओवर कान्फ़िडेन्स के कारण जातक को नुकसान होता है | जब बुध सुर्य के साथ होता है तो जातक को जलदी सफ़लता देता है, खास कर 21-22 से ही जातक किसी ना किसी रूप में धन कमाना शुरु कर देता है,लेकिन उसके बाद जब जातक को लगे कि सब कुछ सैट है, जहाँ पर जातक रिसक लेता है लालच करता है, 30-32 तक पहुँच कर जातक को नीचे गिराना शुरु कर देता है | जब कुण्डली में बुध चन्द्रमा के साथ होता है, तो भी धन तो देता है लेकिन रिश्ते के मामले में धोखा देता है, कम उम्र में ही जातक के चरित्र का पतन होना शुरू हो जाता है, जातक प्रेम सम्बन्ध की तरफ़ और खुद की खुबसुरती की तरफ़ ज़्यादा ध्यान देने लग जाता है और पढाई से जातक का मन भटक जाता है, हर समय जातक के मन में कोई ना कोई फ़ितूर चलता रहता है, जातक कभी शान्त नहीं रह पाता | कुण्डली में जब मंगल बुध के साथ होता है तो यही बुध जातक के जोश, जुनुन और जुररत को बांध देता है, जातक के दोस्त ही उसके सामने उसका उपहास करते हैं और जातक को इस मानहानी के घूट पीने पडते हैं, वह अन्दर ही अन्दर घुटता रहता है | और यही बुध मंगल के कारण ही जातक का शरीर कमज़ोर होता है, पतला होता है, जातक में खून की कमी या फ़िर हृदय से सम्बन्ध रोग होते हैं, हर छोटी छोटी बात पर जातक घबराता है, एग्ज़ेम है उस से पहले जातक का मन घबराता है, कोई इन्ट्रवियु है उस से पहले जातक को घबराहट शुरु हो जाती है, कलास में प्रिंसिपल ने आना है ये सुन कर ही जातक घबरा जाता है | और जब कुण्डली में बुध ब्रहसपति के साथ होता है, तो जातक अपने ही बडो का सम्मान नहीं करता, जातक एक अच्छा शिष्य नही बन सकता क्युकि वो चीज़ो को बारीकी से समझने की कोशिश नहीं करता | जातक को अपने ही माता पिता की सलाह पर चलना पसंद नहीं होता, हालकि माता पिता से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं लेकिन कुछ ना कुछ वैचारिक मत भेद चलते रहते हैं | जातक का अपने ही पिता के साथ दोस्ताना सम्बन्ध नहीं होता, जातक अपने पिता के साथ फ़ुरसत के पल नहीं बिता सकता, जातक अपने ही पिता के साथ खरीदारी करने नही जा सकता, और अगर कर भी आये तो घर आकर बहस और नोक झोक शुरु हो जाती है | ऐसा बुध कभी भी जातक को बडो के सानिधय में रहने नहीं देता, जातक को उस के टीचर्स से बात चीत करने नहीं देगा, टीचर्स से सवाल करने नहीं देगा, चीज़ो को समझने नहीं देगा, सिर्फ़ किताबी रट्टा मारने की आदत बना देता है | जातक खुद को दूसरो से ज़्यादा बुद्धीमान और चतुर समझने लगता है | और जातक धर्म से विमुख होता चला जाता है, संस्कार और रिवाजो से दूर होता चला जाता है | और एक समय ऐसा आ जाता है कि जातक के पास धन तो होता है लेकिन रिश्ते नहीं होते, रिश्तो का सुख नहीं होता | जातक के खुद बच्चे उस का बुढापे में साथ नहीं देते उसका हाल नहीं पुछते |

PARAMJIT SINGH
MOBILE No 98150 97826

08/09/2018
12/06/2017

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *आज का दिनांक 12 जून 2017*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2074*
⛅ *शक संवत -1939*
⛅ *अयन - उत्तरायण*
⛅ *ऋतु - ग्रीष्म*
⛅ *गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार मास - ज्येष्ठ*
⛅ *मास -अषाढ़*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - तृतीया*
⛅ *नक्षत्र - पूर्वाषाढा*
⛅ *योग - ब्रह्म*
⛅ *राहुकाल - सुबह 07:10 से सुबह 08:54 तक*
⛅ *सूर्योदय - 05:57*
⛅ *सूर्यास्त - 19:19*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए* 🌷
👉 *13 जून 2017 मंगलवार को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है ।*
🙏🏻 *शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :*
🌷 *ॐ गं गणपते नमः ।*
🌷 *ॐ सोमाय नमः ।*
🙏🏻 *
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷
🙏 *अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…*
🌷 *> बिना नमक का भोजन करें*
🌷 *> मंगल देव का मानसिक आह्वान करो*
🌷 *> चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें*
💵 *कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |*
🙏🏻 *
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मंगलवार चतुर्थी* 🌷
👉 *भारतीय समय के अनुसार 13 जून 2017 को (सूर्योदय से 12 जून प्रात: 03 : 03 तक) चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें,शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं..*
*👉🏻मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :-*
🌷 *1) ॐ मंगलाय नमः*
🌷 *2) ॐ भूमि पुत्राय नमः*
🌷 *3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः*
🌷 *4) ॐ धन प्रदाय नमः*
🌷 *5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः*
🌷 *6) ॐ महा कायाय नमः*
🌷 *7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः*
🌷 *8) ॐ लोहिताय नमः*
🌷 *9) ॐ लोहिताक्षाय नमः*
🌷 *10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः*
🌷 *11) ॐ धरात्मजाय नमः*
🌷 *12) ॐ भुजाय नमः*
🌷 *13) ॐ भौमाय नमः*
🌷 *14) ॐ भुमिजाय नमः*
🌷 *15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः*
🌷 *16) ॐ अंगारकाय नमः*
🌷 *17) ॐ यमाय नमः*
🌷 *18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः*
🌷 *19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः*
🌷 *20) ॐ वृष्टि हराते नमः*
🌷 *21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः*
🙏 *ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :-*
🌷 *भूमि पुत्रो महा तेजा*
🌷 *कुमारो रक्त वस्त्रका*
🌷 *ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम*
🌷 *ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे*
🙏 *हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ..*
🙏 Paramjit Singh 98150 97826
🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏🏻

09/02/2014

कालसर्प योग में राहु खाना नम्बर एक में हो और केतु खाना नम्बर सात में तब अपने पास चांदी की ठोस गोली रखनी चाहिए

09/02/2014

पांचवें घर में सूर्य
लाल किताब के नियमानुसार पांचवें घर में सूर्य का नेक प्रभाव होने से संतान जब गर्भ में आती है तभी से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होना शुरू हो जाता है. इनकी संतान जन्म से ही भाग्यवान होती है. यह अपने बच्चों पर जितना खर्च करते हैं उन्हें उतना ही शुभ परिणाम प्राप्त होता है. इस भाव में सूर्य अगर मदा होता है तो माता पिता को बच्चों से सुख नहीं मिल पाता है. वैचारिक मतभेद के कारण बच्चे माता पिता के साथ नहीं रह पाते हैं.

08/02/2014

हस्त रेखीय ज्योतिष में धब्बे के निशान को शुभ नहीं माना जाता है। यह निशान रोग और बीमारी को दर्शाता है। अलग अलग व्यक्ति के हाथों में यह निशान अलग अलग रंग के होते हैं। धब्बो के निशान और इनका रंग दोनों ही सामुद्रिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ज्योतिष की इस विधा में बताया गया है कि लाल रंग का यह निशान मस्तिष्क रेखा पर मौजूद हो तो यह इस बात का संकेत है कि आपको चोट लग सकती है अथवा शरीर का कोई अंग गिरने या आघात लगने के कारण क्षतिग्रस्त हो सकता है। यह निशान स्वास्थ्य रेखा पर होना यह बताता है कि आप बुखार एवं कुछ शारीरिक रोग से पीड़ित होंगे। नीला और काला धब्बा हथेली पर होना इस बात का सूचक है कि आप तंत्रिक तंत्र (Nervous System) में परेशानी महसूस करेंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जीवन रेखा पर जहां जहां यह धब्बा होता है उस उम्र में आप रोगग्रस्त रहते हैं।

06/02/2014

6 फरवरी 2014 :आपकी राशि
मेष- लाभ के अवसर हाथ से निकलेंगे। यात्रा में सावधानी आवश्यक है। निवेश सोच-समझकर करें। हानि, विवाद के योग हैं। मूल्यवान वस्तु गुम हो सकती है।
वृषभ- व्यय की अधिकता से कर्ज लेना पड़ सकता है। व्यग्रता रहेगी। व्यर्थ भय व्याप्त होगा। यात्रा में हानि का योग है। शत्रु शांत रहेंगे। षड्यंत्र रचेंगे।
मिथुन- हानि, दुर्घटना से बचें। नया व्यापार निवेश सोच-समझकर करें। धार्मिक कार्य में व्यय होगा। यात्रा लाभकारक रहेगी।
कर्क- प्रतिष्ठा दांव पर लग जाएगी। नई योजनाएं बनेंगी, लेकिन अड़चनें आएंगी। घर में व्यय बढ़ेगा। मानसिक कष्ट होगा।
सिंह- आध्यात्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। तंत्र-मंत्र सफल होंगे। शत्रु पराजित होंगे। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा।
कन्या- वाहन, मशीनरी से दुर्घटना के योग हैं। नेत्र पीड़ा तथा मूल्यवान वस्तु के न मिलने से परेशानी बढ़ेगी। व्यापार धीमा चलेगा।
तुला- शारीरिक कष्ट तथा दुर्घटना, चोरी आदि की आशंका है। गृहस्थ जीवन में विवाद हो सकता है। सरकारी कार्य में अड़चनें आएंगी।
वृश्चिक- शत्रु परास्त होंगे। व्यापार-व्यवसाय से हानि के योग हैं। सावधानी आवश्यक है। मूल्यवान वस्तु नहीं मिलेगी।
धनु- पराक्रम से लाभ के अवसर बढ़ेंगे। घर-बाहर सुख-शांति रहेगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश लाभदायक रहेगा। जीवनसाथी का स्वास्थ्य नरम रहेगा।
मकर- यात्रा में दुर्घटना, चोरी इत्यादि की आशंका बनेगी। घर-बाहर वातावरण अशांत रहेगा। शरीर कष्ट रहेगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक रहेगा।
कुंभ- व्यापार-व्यवसाय से लाभ। निवेश लाभदायक रहेगा। दुष्ट जन दुख का कारण बनेंगे। पराक्रम वृद्धि के योग हैं। मान-सम्मान मिलेगा।
मीन- शुभ समाचार मिलेंगे। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। निवेश लाभदायक रहेगा। घर-बाहर सुख-शांति होगी।

06/02/2014

किसी भी भवन की ईशान दिशा सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। इसमें वास्तु अनुरूप भवन का निर्माण हमारी प्रगति में चार चांद लगा देता है। आइए जानते हैं किस प्रकार से भवन निर्माण कराने से आप शुभ परिणाम प्राप्त करेंगे :-

* ईशान दिशा अन्य दिशाओं की तुलना में बड़ी हो तो गृह के निवासी धन-संपत्ति से युक्त रहेंगे। उनके ऐश्वर्य में वृद्धि होगी तथा उनकी संतानें मेधावी होंगी।

* ईशान दिशा में जल का स्थल हो तो गृह के रहवासी निरंतर प्रगति करेंगे।

* ईशान दिशा नीचे हो तो गृह स्वामी अष्टविध संपत्ति के अधिकारी होंगे।

* ईशान ब्लाक में पूर्व की तरफ ढलान पुरुषों के लिए तथा उत्तर की तरफ वाला ढलान स्त्रियों के सर्वांगीण विकास के लिए श्रेष्ठतम होता है।

* ईशान दिशा में पूर्व तथा उत्तर वाली दीवारें पश्चिम तथा दक्षिण दिशा वाली दीवारों की तुलना में नीची होने से चिरकाल तक आरोग्य, सुख-संपत्ति तथा धन लाभ होता है।

* गृह का समस्त जल इस दिशा से बाहर निकलना चाहिए। वर्षा का जल भी इस दिशा से बाहर निकले तो गृह स्वामी के सुख में वृद्धि होती है।

06/02/2014

कुण्डली से दांपत्य का विचार………….
1. गुरु की वैवाहिक जीवन में भूमिका (Role of Jupiter in Marriage Astrology)
सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये भावी वर-वधू की कुण्डली में गुरु पाप प्रभाव से मुक्त (Jupiter should be free for malefic influence) होना चाहिए. गुरु की शुभ दृ्ष्टि सप्तम भाव पर हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों व दिक्कतों के बाद भो अलगाव की स्थिति नहीं बनती है. अर्थात गुरु की शुभता वर-वधू का साथ व उसके विवाह को बनाये रखती है. गुरु दाम्पत्य जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ, संतान का कारक ग्रह भी है. अगर कुण्डली में गुरु पीडित हों तो सर्वप्रथम तो विवाह में विलम्ब होगा, तथा उसके बाद संतान प्राप्ति में भी परेशानियां आती है.

सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये संतान का समय पर होना आवश्यक समझा जाता है. विवाह के बाद सर्वप्रथम संतान का ही विचार किया जाता है. अगर गुरु किसी पापी ग्रह के प्रभाव से दूषित हों तो संतान प्राप्ति में बाधाएं आती है. जब गुरु पर पाप प्रभाव हों तथा गुरु पापी ग्रह की राशि में भी स्थित हों तो निश्चित रुप से दाम्पत्य जीवन में अनेक प्रकार की समस्यायें आने की संभावनाएं बनती है.

2. शुक्र की वैवाहिक जीवन में भूमिका ( Role of Venus in married Life and astrology)
शुक्र विवाह का कारक ग्रह है. वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिये शुक्र का कुण्डली में सुस्थिर होना आवश्यक होता है. जब पति-पत्नी दोनों की ही कुण्डली में शुक्र पूर्ण रुप से पाप प्रभाव से मुक्त हो तब ही विवाह के बाद संबन्धों में सुख की संभावनाएं बनती है. इसके साथ-साथ शुक्र का पूर्ण बली व शुभ (Venus should be strong and auspicious) होना भी जरूरी होता है.

शुक्र को वैवाहिक संबन्धों का कारक ग्रह कहा जाता है. कुण्डली में शुक्र का किसी भी अशुभ स्थिति में होना पति अथवा पत्नी में से किसी के जीवन साथी के अलावा अन्यत्र संबन्धों की ओर झुकाव होने की संभावनाएं बनाता है. इसलिये शुक्र की शुभ स्थिति दाम्पत्य जीवन के सुख को प्रभावित करती है.

कुण्डली में शुक्र की शुभाशुभ स्थिति के आधार पर ही दाम्पत्य जीवन में आने वाले सुख का आकलन किया जा सकता है. इसलिये जब शुक्र बली हों, पाप प्रभाव से मुक्त हों, किसी उच्च ग्रह के साथ किसी शुभ भाव में बैठा हों (When Venus is strong, free of malefic influence and situated with exalted planet) तो, अथवा शुभ ग्रह से दृ्ष्ट हों तो दाम्पत्य सुख में कमी नहीं होती है. उपरोक्त ये योग जब कुण्डली में नहीं होते है. तब स्थिति इसके विपरीत होती है. शुक्र अगर स्वयं बली है, स्व अथवा उच्च राशि में स्थित है. केन्द्र या त्रिकोण में हों तब भी अच्छा दाम्पत्य सुख प्राप्त होता है.

इसके विपरीत जब त्रिक भाव, नीच का अथवा शत्रु क्षेत्र में बैठा हों, अस्त अथवा किसी पापी ग्रह से दृ्ष्ट अथवा पापी ग्रह के साथ में बैठा हों तब दाम्पत्य जीवन के लिये अशुभ योग बनता है. यहां तक की ऎसे योग के कारण ं पति-पत्नी के अलगाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है. इसके अलावा शुक्र, मंगल का संबन्ध व्यक्ति की अत्यधिक रुचि वैवाहिक सम्बन्धों में होने की सम्भावनाएं बनाती है. यह योग इन संबन्धों में व्यक्ति के हिंसक प्रवृ्ति अपनाने का भी संकेत करता है.

इसलिये विवाह के समय कुण्डलियों की जांच करते समय शुक्र का भी गहराई से अध्ययन करना चाहिए.

3. मंगल की वैवाहिक जीवन में भूमिका (Role of Mars in Marriage astrology)
मंगल की जांच किये बिना विवाह के पक्ष से कुण्डलियों का अध्ययन पूरा ही नहीं होता है. भावी वर-वधू की कुण्डलियों का विश्लेषण करते समय सबसे पहले कुण्डली में मंगल की स्थिति पर विचार किया जाता है. मंगल किन भावों में स्थित है, कौन से ग्रहों से द्रष्टि संबन्ध बना रहा है (aspect of Mars for marriage), तथा किन ग्रहों से युति संबन्ध में है. इन सभी बातों की बारीकी से जांच की जाती है.

मंगल के सहयोग से मांगलिक योग का निर्माण होता है (mars causes Manglik yoga in marriage). वैवाहिक जीवन में मांगलिक योग को इतना अधिक महत्वपूर्ण बना दिया गया है कि जो लोग ज्योतिष शास्त्र में विश्वास नहीं करते है. अथवा जिन्हें विवाह से पूर्व कुण्डलियों की जांच करना अनुकुल नहीं लगता है वे भी यह जान लेना चाहते है कि वर-वधू की कुण्डलियों में मांगलिक योग बन रहा है या नहीं.

चूंकि विवाह के बाद सभी दाम्पत्य जीवन में सुख की कामना करते है. जबकि मांगलिक योग से इन इसमें कमी होती है. जब मंगल कुंण्डली के लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति मांगलिक होता है. परन्तु मंगल का इन भावों में स्थित होने के अलावा भी मंगल के कारण वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आने की अनेक संभावनाएं बनती है.

अनेक बार ऎसा होता है कि कुण्डली में मांगलिक योग बनता है. परन्तु कुण्डली के अन्य योगों से इस योग की अशुभता में कमी हो रही होती है. ऎसे में अपूर्ण जानकारी के कारण वर-वधू अपने मन में मांगलिक योग से प्राप्त होने वाले अशुभ प्रभाव को लेकर भयभीत होते रहते है. तथा बेवजह की बातों को लेकर अनेक प्रकार के भ्रम भी बनाये रखते है. जो सही नहीं है. विवाह के बाद एक नये जीवन में प्रवेश करते समय मन में दाम्पत्य जीवन को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए.
प्रेम विवाह करने वाले लडके व लडकियों को एक-दुसरे को समझने के अधिक अवसर प्राप्त होते है. इसके फलस्वरुप दोनों एक-दूसरे की रुचि, स्वभाव व पसन्द-नापसन्द को अधिक कुशलता से समझ पाते है. प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू भावनाओ व स्नेह की प्रगाढ डोर से बंधे होते है. ऎसे में जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी दोनों का साथ बना रहता है.
पर कभी-कभी प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू के विवाह के बाद की स्थिति इसके विपरीत होती है. इस स्थिति में दोनों का प्रेम विवाह करने का निर्णय शीघ्रता व बिना सोचे समझे हुए प्रतीत होता है. आईये देखे कि कुण्डली के कौन से योग प्रेम विवाह की संभावनाएं बनाते है.

1. राहु के योग से प्रेम विवाह की संभावनाएं (Yogas of Rahu increase the chances of a love marriage)

• 1) जब राहु लग्न में हों परन्तु सप्तम भाव पर गुरु की दृ्ष्टि हों तो व्यक्ति का प्रेम विवाह होने की संभावनाए बनती है. राहु का संबन्ध विवाह भाव से होने पर व्यक्ति पारिवारिक परम्परा से हटकर विवाह करने का सोचता है. राहु को स्वभाव से संस्कृ्ति व लीक से हटकर कार्य करने की प्रवृ्ति का माना जाता है.
• 2.) जब जन्म कुण्डली में मंगल का शनि अथवा राहु से संबन्ध या युति हो रही हों तब भी प्रेम विवाह कि संभावनाएं बनती है. कुण्डली के सभी ग्रहों में इन तीन ग्रहों को सबसे अधिक अशुभ व पापी ग्रह माना गया है. इन तीनों ग्रहों में से कोई भी ग्रह जब विवाह भाव, भावेश से संबन्ध बनाता है तो व्यक्ति के अपने परिवार की सहमति के विरुद्ध जाकर विवाह करने की संभावनाएं बनती है.
• 3.) जिस व्यक्ति की कुण्डली में सप्तमेश व शुक्र पर शनि या राहु की दृ्ष्टि हो, उसके प्रेम विवाह करने की सम्भावनाएं बनती है. (Aspect of Rahu on the seventh lord, saturn or venus increases chances of love marriage)
• 4) जब पंचम भाव के स्वामी की उच्च राशि में राहु या केतु स्थित हों तब भी व्यक्ति के प्रेम विवाह के योग बनते है.

2. प्रेम विवाह के अन्य योग (Other astrological yogas for love marriage)

• 1) जब किसी व्यक्ति कि कुण्ड्ली में मंगल अथवा चन्द्र पंचम भाव के स्वामी के साथ, पंचम भाव में ही स्थित हों तब अथवा सप्तम भाव के स्वामी के साथ सप्तम भाव में ही हों तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है.
• 2) इसके अलावा जब शुक्र लग्न से पंचम अथवा नवम अथवा चन्द लग्न से पंचम भाव में स्थित होंने पर प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है. (Venus in fifth or ninth house from ascendant or fifth house from Moon increases love marriage chances)
• 3) प्रेम विवाह के योगों में जब पंचम भाव में मंगल हों तथा पंचमेश व एकादशेश का राशि परिवतन अथवा दोनों कुण्डली के किसी भी एक भाव में एक साथ स्थित हों उस स्थिति में प्रेम विवाह होने के योग बनते है.
• 4) अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में पंचम व सप्तम भाव के स्वामी अथवा सप्तम व नवम भाव के स्वामी एक-दूसरे के साथ स्थित हों उस स्थिति में प्रेम विवाह कि संभावनाएं बनती है.
• 5) जब सप्तम भाव में शनि व केतु की स्थिति हों तो व्यक्ति का प्रेम विवाह हो सकता है. (When Saturn or ketu are in the seventh house the chances for love marriage increase)
• 6) कुण्डली में लग्न व पंचम भाव के स्वामी एक साथ स्थित हों या फिर लग्न व नवम भाव के स्वामी एक साथ बैठे हों, अथवा एक-दूसरे को देख रहे हों इस स्थिति में व्यक्ति के प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है.
• 7) जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्र व सप्तम भाव के स्वामी एक -दूसरे से दृ्ष्टि संबन्ध बना रहे हों तब भी प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है.
• 8) जब सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में ही स्थित हों तब विवाह का भाव बली होता है. तथा व्यक्ति प्रेम विवाह कर सकता है.
• 9) पंचम व सप्तम भाव के स्वामियों का आपस में युति, स्थिति अथवा दृ्ष्टि संबन्ध हो या दोनों में राशि परिवर्तन हो रहा हों तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है. (Combinatin of fifth and the seventh house and mutual aspect or sign exchange causes love marriage)
• 10) जब सप्तमेश की दृ्ष्टि, युति, स्थिति शुक्र के साथ द्वादश भाव में हों तो, प्रेम विवाह होता है.
• 11) द्वादश भाव में लग्नेश, सप्तमेश कि युति हों व भाग्येश इन से दृ्ष्टि संबन्ध बना रहा हो, तो प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है. (Conjunction of lagna lord seventh house or aspect increases chances of love marriage)
• 12) जब जन्म कुण्डली में शनि किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर वह मंगल, सप्तम भाव व सप्तमेश से संबन्ध बनाते है. तो प्रेम विवाह हो सकता है.

06/02/2014

पितृ दोष शान्ति के उपाय call +91 98150 97826 free tele help
Astrosahivji

06/02/2014

पितृ क्या है?
पितरों से अभिप्राय व्यक्ति के पूर्वजों से है . जो पित योनि को प्राप्त हो चुके है . ऎसे सभी पूर्वज जो आज हमारे मध्य नहीं, परन्तु मोहवश या असमय मृ्त्यु को प्राप्त होने के कारण, आज भी मृ्त्यु लोक में भटक रहे है . अर्थात जिन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई है, उन सभी की शान्ति के लिये पितृ दोष निवारण (Pitra Dosha Niwaran) उपाय किये जाते है .
ये पूर्वज स्वयं पीडित होने के कारण, तथा पितृ्योनि से मुक्त होना चाहते है, परन्तु जब आने वाली पीढी की ओर से उन्हें भूला दिया जाता है, तो पितृ दोष उत्पन्न होता है .

पितृ दोष कैसे बनता है?
नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है . शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है . व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है .

पितृ दोष के कारण -
पितृ दोष (Pitra Dosha) उत्पन्न होने के अनेक कारण हो सकते है . जैसे:- परिवार में अकाल मृ्त्यु हुई हों, परिवार में इस प्रकार की घटनाएं जब एक से अधिक बार हुई हों . या फिर पितरों का विधी विधान से श्राद्ध न किया जाता हों, या धर्म कार्यो में पितरों को याद न किया जाता हो, परिवार में धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न न होती हो, धर्म के विपरीत परिवार में आचरण हो रहा हो, परिवार के किसी सदस्य के द्वारा गौ हत्या हो जाने पर, या फिर भ्रूण हत्या होने पर भी पितृ दोष व्यक्ति कि कुण्डली में नवम भाव में सूर्य और राहू स्थिति के साथ प्रकट होता है .

नवम भाव क्योकि पिता का भाव है, तथा सूर्य पिता का कारक होने के साथ साथ उन्नती, आयु, तरक्की, धर्म का भी कारक होता है, इसपर जब राहू जैसा पापी ग्रह अपनी अशुभ छाया डालता है, तो ग्रहण योग के साथ साथ पितृ दोष बनता है . इस योग के विषय में कहा जाता है कि इस योग के व्यक्ति के भाग्य का उदय देर से होता है . अपनी योग्यता के अनुकुल पद की प्राप्ति के लिये संघर्ष करना पडता है .

हिन्दू शास्त्रों में देव पूजन से पूर्व पितरों की पूजा करनी चाहिए . क्योकि देव कार्यो से अधिक पितृ कार्यो को महत्व दिया गया है . इसीलिये देवों को प्रसन्न करने से पहले पितरों को तृ्प्त करना चाहिए . पितर कार्यो के लिये सबसे उतम पितृ पक्ष अर्थात आश्चिन मास का कृ्ष्ण पक्ष समझा जाता है .

05/02/2014

Address

Bathinda
151001

Telephone

09815097826

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Astrosahivgi posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Astrosahivgi:

Share