18/10/2016
ये तस्वीर मिन्हाज अंसारी की है।
पुलिस हिरासत में इसको पीट- पीट कर मार दिया गया। बीफ के साथ मिन्हाज की तस्वीर सोशल मीडिया में सर्कूलेट हो रही थी। इस बिनाह पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस कस्टडी में उसे इस हद तक मारा गया कि उसे अपने बेगुनाही साबित करने तक मौका नहीं मिला। 7 अक्टूबर मिन्हाज की मौत हो गई। मिनहाज अंसारी के चाचा कादिर मियां कहते हैं इसकी गारंटी कौन लेगा कि जिस मांस को बीफ़ मानकर पुलिस ने मिनहाज को गिरफ्तार किया वह आख़िर बीफ़ है भी या नहीं । क्या मिन्हाज ने इतना बड़ा जुर्म किया था कि उसे अदालत से सजा देने का हक भी पुलिस ने उससे छीन लिया।
22 साल का मिनहाज खामोशी के साथ इस दुनिया से चला गया। अख्लाक की तरह न्यूज चैनलों में इसके लिए बहस नहीं खड़ी की गई। किसी ने अवार्ड नहीं लौटाया। किसी नेता ने राज्यसभा में आवाज नहीं उठाई। किसी ने प्राइम टाइम नहीं किया। कौम का ठेकेदारों का खून भी उबाल नहीं मारा। ऐसा लगता है मानों हमने गाय की रक्षा नाम पर मुस्लिमों की हत्या को स्वीकृति दे दी है।
फहद सईद,
वरिष्ठ पत्रकार