30/05/2021
*।।🌞सुप्रभातम्🌞।।*
*🙏🏻📙आज का चाणक्य सूत्र:-* *||१३||*
*🕉️।।संस्कृत श्लोकः।।🕉️*
*यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।*
*ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव च ।।*
*🌹शब्दार्थ:-*
*जो हाथ में आए निश्चित पदार्थों को छोड़कर अनिश्चित पदार्थों को पाने की चेष्टा में उनके पीछे भागता है, उस मूर्ख को अनिश्चित का मिलना तो दूर रहा, उसके निश्चित भी नष्ट हो जाते हैं। जब तक वह अनिश्चित पाने की ललक में भटकता है, तब तक निश्चित लोप हो जाते हैं।*
*उपरोक्त श्लोक को यों भी समझा जा सकता है कि मनुष्य को चाहिए कि जो कुछ पदार्थ-धन-संपदा, खाने-पीने की चीजें आदि उसके पास है, पहले उन्हें अच्छी तरह संजो ले। उनका उचित ढंग से उपयोग करना जान ले। उसके बाद ही आगे पाने का प्रयत्न करें। कहा भी गया है- (आधी छोड़ सारी खुद आवे आधी रहना सारी पावे।)*
*दूसरों के पास अधिक सुख की चीजें देखकर, उनको पाने के लिए लालयित व्यक्ति, अपने सुख पर ध्यान न देकर दूसरों का अधिक सुख पाने को भागता है, तब निश्चित रूप से उसका सुख भी उससे छूट जाता हैं।*
*🌹भावार्थ:-*
*जो मनुष्य निश्चित को छोड़कर अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका निश्चित कार्य या पदार्थ नष्ट हो जाता है एवं अनिश्चित तो नष्ट है ही।*
*🌹महत्ता:-*
*अनिश्चितता के पीछे दौड़ना कभी अच्छा नहीं।*