29/07/2014
अपने दिल मेँ गीता और कुरान रखता हूँ
किसी का दिल न दुखे ध्यान रखता हूँ
मस्जिद मंदिर गुरद्वारा व चर्च के प्रति
हृदय मेँ खासा अदब सम्मान रखता हूँ
इंसां हूँ मैँ, इंसानियत है मजहब मेरा
इश्क वास्ते हथेली पे मैँ जान रखता हूँ
दामन बचा कर चलना मेरी फितरत है
गंगा सा पवित्र अपना गिरेबान रखता हूँ
चादर जितनी, पसार लेता हूँ पैर उतने
मैँ कच्चे घर मेँ भी नवाबी शान रखता हूँ
मत डालिये जात पात के झगड़ोँ मेँ, मैँ
दोस्तोँ मेँ कुछ सिँह कुछ खान रखता हूँ
मिले सबको रोटी कपड़ा और मकान
ख्वाबोँ मेँ ऐसा एक हिँदुस्तान रखता हुॅ । आज के इस खुशी और उत्साह के मुबारक दिन "ईद" की सभी स्नेहीजनो को मुबारक बाद ।