23/09/2022
" काम की बात " title पढ़ कर आप एक पल के लिए शायद से, ये सोच रहे होंगें कि कोई बहुत important काम की बात या fact लिखा होगा। है कि नहीं। अब मैं ज्यादा इधर उधर की बातें न करके । चलो मैं सीधे आपको बात के प्रकर के बारे में बताता हूँ कि
बात दो ही प्रकार की होती हैं।
एक, काम की बात और दूसरी, मन की बात।
होती दोनों बात ही हैं, लेकिन दोनों में काम की बात और मन की बात में Basic Difference होता है।
जहां काम की बात कही जा रही हो वहां पर मन की बात नहीं होती,और जहाँ मन की बात कही जा रही हो वहाँ काम की बात नहीं होती। दरअसल मन की बात, की ही इसलिए जाती है, ताकि काम की बात न करनी पड़े।
काम की बात अपने काम से काम रखती है। लेकिन मन की बात में घुंईया, अदरक, लहसुन आदि की बाते होती है। मतलब की इधर उधर की बाते। आप समझ ही गये होंगे कि मैं क्या समझाना चाह रहा हूँ। दरअसल मैं भी अपने मन की बात आपके सामने रख रहा हूँ।अब हम अपने काम और मन की बात पर आते है तो मैं कहाँ पर था। हां, मैं कह रहा रहा था कि
बात मन की हो या काम की, यदि कोई काम की बात करे और उसकी कोई न सुने, तो बेचारे की अच्छी खासी काम की बात भी मन की बात होकर रह जाती है। जबकि मन की बात को सुनने वाले मिल जाएं, तो मन की बात होने के बावजूद बड़े काम की बात बन जाती है।
है कि नहीं बताओ...
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