भारत पुनर्निर्माण संघ की आवश्यकता क्यूँ ?
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देश में चारो ओर अन्याय, अत्याचार, शोषण, गरीबी, अशिक्षा, अस्थिरता, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बेरोजगारी, मिलावटखोरी , बदती हुई मंहगाई, अपराध, स्त्रियों और बच्चों के विरुद्ध किये जाने वाले अपराध , कुपोषण, गुंडागिर्दी आदि समस्याएँ कायम हैं |
गलत देश निति , विदेश निति , कृषि निति, जल निति, वन निति आदि गलत निति हैं |
देश का ना
गरिक आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी न्याय , शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ सेवाएं, दो वक्त की रोटी, सर पर छत और तन पर कपडे के लिए ही लढ़ रहा है|
ऐसी स्थति में ये जरुरी हो गया है की देश के पूरी तंत्र एवं व्यवस्था को बदला जाये और अंग्रेजो के बनाये लूट-खसूट के कानून की जगह भारत की भोगोंलिक एवं सामाजिक संरचना के आधार पर एक नई व्यवस्था बनायीं जाये |
ये हमारे देश की बिडमना है कि आज़ादी कि पूर्व रात्रि को ही देश का बटवारा हो गया |
हमारे शहीदों ने जिन मूल्यों के लिए अपना सर्वस्य त्याग दिया और हस्ते-२ फांसी के फंदे को गले लिया | जिस आज़ादी के लिए देशवासियों ने ना जाने कितने अत्याचार, शोषण, दर्द और कष्ट सहे वो आज भी अधूरी है |
आज शहीद भगत सिंह जी का कहा याद आता है -" इस तरह से मिलने वाली आज़ादी १० फीसदी ऊपर के लोगो की आज़ादी होगी, पूंजीपतियों-साहूकारों और ताकतवर लोगो की आज़ादी होगी |" आज ये सच भी साबित हो गया |
देश विदेशी कर्ज से लदा है एक ब्रिटिश साम्राज्यवाद की जगह सेकड़ों विदेशी डाकू देशी धन्ना सेठों से मिलकर भारत की जनता की महनत को और हमारी इस सर्वगुणसम्पन्न धरती को लूट रहे हैं और हमें गहरे अँधेरे में धकेला जा रहा है |
देश ने अब तक कितने ही जाती, धर्म, क्षेत्र और भाषा पर आधारित दंगो को झेला है, जिनके पीड़ित लोग आज भी न्याय के लिए तरस रहे हैं | एक-दो अपवादों को छोड़ दिया जाये तो अधिकांश दंगे सत्ता के दलालों के इशारे पर हुए हैं |
हमारी संस्कृति पर गहरे अघात हो रहे हैं देश के अधिकांश आबादी की मूल भावना का कोई मोल नही |
आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी आज जब हमारे पालनहार किसान अपने हक़ की बात करता है तो उसे लाठी -डंडों और गोलियों का निशाना बनाया जाता है | उनकी कृषि योग्य भूमि जबरन छीन ली जाती है | पिछले 15 सालों में 6 लाख एकड़ कृषि योग्य भूमि छीन ली गयी है | अब उन किसानो का क्या होगा ?
कैसी बिडमना है कि जिस देश में 65-70% आबादी कृषि पर आश्रित है जो अपना भरण-पोषण खेती से ही करता है उसे उसका सही मुल्य भी सही नही मिलता है |
आज हमारी इस व्यवस्था के कारण एक ताकतवर और धनिक व्यक्ति दुसरे कमजोर और गरीब का शोषण करता है |
देश की अर्जुन सेन कमेटी ने बीस रूपये रोज या उससे कम में गुजरा करने वाली आबादी के आधार पर गरीबी का अनुपात ७७ फीसदी आंका है |
आज़ादी के दशको बाद भी देश की बड़ी आबादी रोटी, कपडा, मकान, चिकित्सा, न्याय ,शिक्षा, समाज में सुरक्षा , पीने योग्य पानी बिजली, सडकें, रोजगार आदि मुलभुत सुविधाओं से वंचित है|
हमारे क्रांतिकारियों जिनके संगर्ष एवं बलिदान से ये देश आजाद हुआ | आज हमारे देश के बच्चों के सामने उन्हें आतंकवादी पेश किया जा रहा है| एक सोची-समझी घिनौनी राजनीती के तहत उनको भुला दिया है | जबकि सही अर्थों में वही हमारे सच्चे नेता थे |
होना क्या चहिये
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"हमारी लड़ाई अन्याय पर आधारित मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ है | जहाँ एक ताकतवर और अधिकार संपन्न व्यक्ति दुसरे कमजोर और गरीब का शोषण करता है |"
हमारा प्रयास अन्याय, अत्याचार, शोषण, गरीबी, अशिक्षा, अस्थिरता, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बेरोजगारी, मिलावट खोरी , बदती हुई मंहगाई, अपराध, स्त्रियों और बच्चों के विरुद्ध किये जाने वाले अपराध , कुपोषण, गुंडागिर्दी, लचर कानून व्यवस्था आदि को मिटाकर अपने देश को सच्चे अर्थों में प्रजातान्त्रिक देश बनाना है |
सभी के लिए भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा, न्याय, समाज, में सुरक्षा पीने योग्य पानी, बिजली, सडकें, आदि मुलभुत सुभिधाओं की व्यवस्था होनी चहिये न सिर्फ कहना |
कोई भी महिला, कोई भी शिशु कुपोषण का शिकार ना हो | कोई भी व्यक्ति भोजन के आभाव में भूख से पीड़ित होकर आत्महत्या ना करे |
सेना-पुलिस, अर्धसैनिक बलों के जवान चिंता एवं तनाव से आत्महत्या ना करे |
सही मायने में सही नीति बने और लागू होनी चाहियें |
पुराना चला आ रहा ब्रिटिश कानून सुधारना जो की ब्रिटिश मानसिकता का सूचक है | संविधान में भारतीय परिस्थितियों एवं समस्यों के अनुरूप अमूल-चूल परिवर्तन करना एवं जल्दी न्याय मिले ऐसी व्यवस्था करना |
देश द्रोह करने वालों के लिया व्यापक कानून बनाना एवं उनके खिलाफ स्पेशल अदालतों में जल्दी फेंसला होना चाहिए |
सरकार द्वारा योजनाओं एवं देशवासियों के लिए जारी धन को पूर्णरूप से योजनाओं एवं देशवासियों तक पहुँच सके ऐसी व्यवस्था करना ना कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्री राजीव गाँधी के कहे अनुसार 1 रूपये में 15 पैसे मिलना |
मिलावट खोंरों, घूसखोरों के विरुद्ध लोगों को जागरूक करना जिससे टूटी-फूटी सड़कों और दूषित भोजन से बचा जा सके| जिससे स्वस्थ एवं समर्द्ध भारत का पुनर्निर्माण हो सके |
हमारे वीर शहीदों ने जो आज़ादी हमें दी है उसे बनाये रखना और उनके सपनो के भारत बनाने की हर संभव कोशिश करना |
राष्ट्र निर्माण में लगे हुए सभी शक्ति एवं संगठनों को सहयोग देने एवं लेने और ऐसे सभी शक्ति-संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश करना |
देश में पोलीथिन पर पूर्णत: रोक लगवाना |
१८ वर्ष की कम उम्र के युवाओं के लिए धुम्रपान, गुटखा, शराब खरीद और रखने पर पूर्णत: रोक लगनी चाहिए एवं ऐसी व्यवस्था करवाना जिससे धुम्रपान, गुटखा, शराब की दुकाने रिहाइसी इलाके से दूर हों |
कृषि को बढावा देना एवं मुख्य व्यवसाय के रूप में स्थापित करना एवं दलालों पूंजीपतियों का हस्तक्षेप ख़त्म करना |
जारी है................